कौशल्या वर्ल्ड स्कूल के प्रांगण में जन्माष्टमी के महापर्व का आयोजन किया गया |

कौशल्या वर्ल्ड स्कूल के प्रांगण में जन्माष्टमी के महापर्व का आयोजन किया गया | जिसमें छोटे-छोटे बच्चों ने श्रीकृष्ण के जीवन की बाल लीलाओं की प्रस्तुति दी | इस अवसर पर बच्चे पारंपरिक वेश-भूषा में सजे-धजे नजर आये| इस उपलक्ष्य में विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया जिसमें श्रीकृष्ण के जीवन से संबंधित नाटक मंचन किया गया और इनके मधुर भजनों की भी प्रस्तुति हुई | इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ० तानिया गुप्ता, प्रधानाचार्या, आर्मी इंस्टीटूट ऑव एजुकेशन ग्रेटर नॉएडा, उपस्थित रहीं | स्कूल के प्रधानाचार्य जी ने उनका स्वागत करते हुए आभार प्रकट किया कि उन्होंने अपना मूल्यवान समय स्कूल को दिया |

जन्माष्टमी के इस पर्व पर एक विशेष मोर्निंग असेंबली आयोजित की गई, जिसकी शुरुवात एक बेहद ही मधुर प्रार्थना से की गयी | उसके पश्चात् श्री कृष्ण की विविध ‘लीलाओं’ को दर्शाते हुआ एक नाटिका का मंचन किया गया , जिसमें दिखाया गया कि जब जब पृथ्वी पर बुराई बढ़ती है तो तब-तब भगवान जन्म लेते हैं |

इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ० तानिया गुप्ता ने भी सभा को संबोधित किया और आशीर्वाद प्रदान किए। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम वास्तव में महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे हमें हमारी संस्कृति और भविष्य की पीढ़ी को साथ जोड़े रखते हैं | उन्होंने सभी को जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं और आमंत्रण के लिए दिल से धन्यवाद दिया। साथ ही, श्रीकृष्ण और राधा के रूप में सजे छोटे बच्चों को स्नेह और आशीर्वाद दिया |

इस अवसर पर विद्यालय की चेयरपर्सन श्रीमती कुशल सिंह  ने कृष्ण के मैनेजमैंट और गीता उपदेशों को जीवन में उतारने की बात कही, और कहा कि हमें गीता के श्लोकों के अनुसार कर्म करने में विश्वास रखना चाहिए न कि कर्म फल की इच्छा करनी चाहिए | साथ ही श्रीकृष्ण के बालरूप में सजे छोटे-छोटे बच्चों को अपने स्नेह और आशीर्वाद से पल्लवित किया |

विद्यालय के प्रधानाचार्य श्री जे० के० सिंह ने कहा कि विद्यालय में छात्रों की विभिन्न प्रतिभाओं को उजागर करने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिससे उनमे बचपन से ही अपने प्रतिभा को पहचानने का अवसर मिलता है| उन्होंने कहा कि द्वापरयुग में श्रीकृष्ण ने जो श्रीमद् भगवद्गीता का अर्जुन को कर्मयोग का उपदेश दिया था वो वास्तव में आज भी लोगों को रास्ता दिखा रहा है| उन्होंने कहा कि कर्म और भाग्य में कर्म श्रेष्ठ है क्योंकि कर्म के द्वारा भाग्य को भी बदला जा सकता है इसलिए भाग्य के भरोसे न रहकर कर्म करते रहना चाहिए |

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