ग्रेटर नोएडा की जानी मानी समाजसेविका और महिला शक्ति उत्थान मण्डल की संस्थापक श्रीमति रुपा गुप्ता से खास बातचीत…

प्रस्तुत है ग्रेटर नोएडा की जानी मानी समाजसेविका और महिला शक्ति उत्थान मण्डल की संस्थापक श्रीमति रुपा गुप्ता से हमारे संवाददाता टीकम सिंह की खास बातचीत के मुख्य अंश:-
रुपा जी आप हमारे पाठकों को अपने बारे में बताइए ?
मेरा नाम रुपा गुप्ता है,मूल रूप से मैं औरैया जिले की रहने वाली हूं.लेकिन पिछले काफी समय से मैं ग्रेटर नोएडा में रह रही हूं. मेरे परिवार ने देश की आजादी में बढ-चढ़ कर हिस्सा लिया था और उसी से प्रेरणा लेकर मैं महिलाओं की सशक्तिकरण के लिए ,समाज की बेहतरी के लिए “महिला शक्ति उत्थान मण्डल” संस्था के माध्यम से लगातार कार्य कर रही हूं.
महिला शक्ति उत्थान मण्डल ने किन किन मुद्दों को उठाया है और उसमें कितनी सफलता आपको मिली है?
देखिए हमने लगभग सभी सामाजिक मुद्दों पर कार्य किया है परंतु विशेष रूप से हमने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कार्य किया है. जैसे कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए ट्रेनिंग दिलवाना ,आत्मरक्षा के गुर सिखाना ,ड्राइविंग लाइसेंस बनवाना ,गरीब लड़कियों की शादी करवाना इत्यादि इसके अलावा हमने पर्यावरण जागरूकता के लिए कार्य किया है ,नेत्रदान करवाना, अंगदान करवाना, साफ सफाई करवाना ,शुद्ध पेयजल की व्यवस्था कराना आदि ऐसे बहुत सारे मुद्दे हैं जिस पर हम वर्षो से कार्य कर रहे हैं.
रुपा जी जैसा कि हम देखते हैं कि समाज सेवा का जो कार्य है ज्यादातर पुरुष ही करते हैं महिलाओं की  उपस्थिति बहुत कम है तो आपको कैसे विचार आया कि मुझे समाज सेवा करनी है?
आपने बहुत ही अच्छा प्रश्न किया है क्योंकि महिलाओं के ऊपर बहुत सारी घरेलू जिम्मेदारियां होती हैं और समाज भी पुरुष प्रधान हैं . सुरक्षा कारणों से ज्यादातर महिलाएं घर से बाहर निकल कर काम करने में बहुत असुविधा महसूस करती हैं और मुझे लगता है यही कारण है कि महिलाएं समाज सेवा के क्षेत्र में बहुत कम है .ऐसा नहीं है कि वह कार्य नहीं करना चाहती परंतु उनकी अपनी घरेलू समस्याएं हैं जिसकी वजह से वह इस क्षेत्र में नहीं आ पाती है. और इसके अलावा पुरुषवादी जो संगठन है वह भी उनको स्वीकार नहीं पाते हैं . मैं यह कहना चाहती हूं कि यदि महिला और पुरुष दोनों मिलकर के एक साथ कार्य करें तो समाज सेवा के कार्य को बहुत अच्छे ढंग से कर सकते हैं. रही बात मेरी तो देखिए मैं तो समाज सेवा में इसलिए आई क्योंकि मेरा तो पूरा परिवार ही समाज सेवा के प्रति समर्पित रहा है मेरे बुजुर्गों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों को न्योछावर  किया है.
समाज सेवा का कार्य करते हुए किन-किन दुश्वारियों से दो चार होना पड़ता है?
देखिए वैसे तो मुझे दिक्कत परेशानी कि कभी चिंता नहीं रही है परंतु फिर भी एक कई बार होता है कि कुछ लोग मुझे स्वीकार नहीं कर पाते हैं और कई बार प्रताड़ित भी करते हैं जैसे मैं आपको एक उदाहरण से बताऊंगी कि हमने पानी का एक मुद्दा उठाया था जो कि हमारा मूलभूत अधिकार है परंतु प्राधिकरण ने खफा होकर हमारे घर के आगे ही कूड़ा डाल दिया और SC /ST एक्ट के अंतर्गत हमारे ऊपर मुकदमा भी करा दिया .इसके अलावा सिटी पार्क का मुद्दा हमने उठाया था लेकिन हमें अधिकारियों के और अन्य अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं के कोप का भाजन बनना पड़ा .इसके अलावा जब हमने सामूहिक विवाह का प्रोग्राम रखा तो हमारे पोस्टरों को फाड़ दिया गया.इस प्रकार की चीजों से पीड़ा होती है, दुख होता है ,परेशानी होती है . इस सब के बावजूद भी मैं सिर्फ इतना ही कह सकती हूं कि इस प्रकार की चीजों में जो भी सामाजिक संगठन है मेरी मदद करें और मेरी मदद लें न कि मुझसे द्वेष करें ताकि हम सब मिलकर समाज हित के कार्य अच्छे से कर पाए.
रुपा जी अपना कीमती समय देने के लिएआपका बहुत-बहुत धन्यवाद. और हम कामना करते है कि आप इसी प्रकार समाज हित के कार्य करती रहें
मैं नोएडा व्व्यूज की पूरी टीम को आभार प्रकट करती हूं की वह सच्ची पत्रकारिता कर रहे हैं. आपने सिटी पार्क का जो मुद्दा उठाया था वह वाकई काबिले तारीफ है और मैं उम्मीद करती हूं कि आप भविष्य में भी इसी तरीके से निष्पक्ष पत्रकारिता करते हुए चौथे स्तम्भ होने के धर्म का पालन करते रहेंगे मेरी आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं.

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