युवा अपनी जीविकापार्जन के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का भी निर्वहन करें।

पेश है उभरते हुए युवा उद्यमी और समाजसेवी श्री गौरव सत्यार्थी जी के साथ हमारे संवाददाता टीकम सिंह की वार्तालाप के मुख्य अंश :-

मैं चाहूँगा कि आप हमारे पाठकों को अपना परिचय दें।

मेरा नाम गौरव सत्यार्थी है.मूल रूप से अलीगढ़ के कस्बा विजयगढ का निवासी हूं.वर्तमान में ग्रेटर नोएडा में रह रहा हूं. ग्रेटर नोएडा में मोजर बेयर और अन्य अन्य कंपनियों में लगभग 10 वर्ष नौकरी करते हुए महसूस किया कि मैं पैसा तो बहुत कमा रहा हूं लेकिन समाज के लिए कोई योगदान नहीं दे पा रहा हूं जिसके बाद नौकरी से त्याग पत्र देकर सत्यार्थ ग्रीन प्रोडक्टस के नाम से रिटेल स्टोर की स्थापना करके एक उधमी के तौर पर कार्य करना प्रारंभ किया.साथ ही साथ सत्यार्थ फाउंडेशन नामक संस्था के द्वारा सामाजिक कार्यों में भी अपना थोड़ा बहुत योगदान देता हूं.

सत्यार्थी जी जैसा की अभी आपने सत्यार्थ फाउंडेशन के बारे में जिक्र किया,यह क्या है और इसके द्वारा आप कौन-कौन से सामाजिक कार्य करते हैं

सत्यार्थ फाउंडेशन एक संस्था है जो शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर कार्य करती है.संस्था ने कई प्रमुख कार्य किए हैं जिनमें सबसे प्रमुख कार्य जो किया है वह यह कि अलीगढ़ में एक प्राइमरी स्कूल को गोद लिया और उस स्कूल का कायाकल्प करने के लिए कार्य किया. इस स्कूल के अंदर चारदीवारी,टॉयलेट, बच्चों के बैठने के लिए सीट और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं थी. इन समस्याओं को हमने संस्था के द्वारा इकट्ठे किए गए धन से और विभाग के सहयोग से  दूर कराने की कोशिश की, चारदीवारी गेट व शौचालय का कार्य हो भी गया लेकिन और बड़े बदलाव के लिए आवश्यक सहयोग विभाग से नहीं मिल सका.

आज जहां हर युवा एक अच्छी नौकरी की तलाश में है वही आपने एक अच्छी खासी नौकरी को छोड़ कर के उधमी बनने का निर्णय किया तो यह विचार आपके मन में कैसे आया?

मेरे जीवन मे मेरे नाना जी स्व हरिओम शंकर शर्मा जी का बहुत प्रभाव रहा है जोकि विजयगढ के स्कूल मे उप प्रधानाचार्य थे और समाज के भले के लिए सदैव कार्य करते थे.तो बचपन से ही मेरे चारों तरफ का वातावरण ऐसा रहा जहां पर सामाजिक कार्यों में परिवार के लोग अपना योगदान दिया करते थे. अपनी इंजीनियरिंग करने के बाद नोएडा आया और मैंने अलग-अलग कंपनियों में नौकरी की एक अच्छे पद पर पहुंचा.यह सफर लगभग 10 साल चला और इसी बीच मैंने महसूस किया कि मैं धन तो बहुत कमा रहा हूं परंतु समाज के लिए 1 मिनट का समय भी मैं नहीं दे पा रहा हूं क्योंकि बचपन के संस्कार थे कि समाज के लिए कुछ करना है जो की नौकरी में संभव नहीं हो पा रहा था तो आखिरकार 2012 में मैंने नौकरी से त्यागपत्र देकर व्यापार शुरू किया क्योंकि व्यापार में आप अपनी जीविकापार्जन के साथ-साथ समाज के लिए भी कुछ समय दे सकते हैं.इसी सोच के साथ सत्यार्थ ग्रीन प्राडक्टस की स्थापना की और परमात्मा का आशीर्वाद रहा और मेरे परिवारीजन व मित्रों का सहयोग मिला कि मुझे व्यापार मे काफी कामयाबी मिली और आज हमारे 3 रिटेल स्टोर हैं और मैं व्यापार के साथ-साथ समाज के प्रति जो मेरी जिम्मेदारियां हैं मैं उन्हे भी निभाने का प्रयास कर रहा हूं.

सत्यार्थी जी व्यापार करते हुए सरकारी तंत्र के कारण बहुत सारी दिक्कतों का सामना पड़ता होगा तो आप शासन-प्रशासन और सरकारी तंत्र से किस प्रकार का सहयोग चाहते हैं ताकि देश का युवा निश्चिंत होकर अपना व्यापार कर सके

आपने बहुत ही अच्छा सवाल पूछा है क्योंकि व्यापार करते हुए कई बार मैंने यह महसूस किया है कि सरकारी तंत्र नियमों का हवाला देकर उधमियों का शोषण करते हैं जिससे उनके अंदर भय व्याप्त रहता है.मेरा शासन प्रशासन और संपूर्ण सरकारी तंत्र से यह निवेदन है कि व्यापारियों के अंदर डर भरने के बजाय हौसला दे कि आप अपना व्यापार अच्छे से चलाएं और यदि उसमें किसी भी प्रकार की सहायता हमारी तरफ से चाहिए तो वह उनको समय समय पर प्रदान की जायेगी. मैं एक छोटा सा उदाहरण आपको देता हूं कि नोयडा ,ग्रेटर नोएडा में उद्यमी भारी भरकम किराए पर प्रतिष्ठान चला रहे हैं जिसे निकालना मुश्किल होता है ऐसे में अगर विभाग विभिन्न नियमों और कानूनों का हवाला देकर शोषण करते हैं तो उद्यमी टूट जाता है, विभागों के कुछ गिने चुने लोग किसी न किसी बहाने से अपनी व्यक्तिगत कमाई करने की कोशिश करते हैं जबकि उल्टा अधिकारियों और कर्मचारियों को व्यापारी और उद्यमी को मदद के लिए आगे आना चाहिए। मेरा सभी सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों से यही निवेदन रहता है कि वो स्व रोजगार चलाने वालों व अन्य लोगों को भी रोजगार देने वालों का ख्याल करते हुए उनका सहयोग करें ।आज जहां देश के प्रधानमंत्री मोदी जी ,मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी पकौड़ा बेचने को भी व्यापार के रूप में स्थापित कर रहे हैं यानी उनका मानना है कि एक समोसा या पकोड़ा बेचने वाला भी 2~3 परिवारों को पालता है. उसका ख्याल होना चाहिए,वहीं बहुत सारे उद्यमी खुद को प्रताडित महसूस करते हैं जब उनको नियमो व कानूनों के नाम पर शोषण किया जाता है.जब तक सरकारी तंत्र योजनाओं को ईमानदारी से क्रियान्वित नही करेंगे तब तक प्रधानमंत्री जी व मुख्यमंत्री जी के सपनों का साकार होना संभव नही हैं.

और अंत में आप देश के युवाओं को क्या संदेश देना चाहते हैं.

मेरा देश के सभी युवाओं को यही संदेश है कि आप जो भी कार्य करें उसको पूरी श्रद्धा,मेहनत और समर्पण के साथ करें .फिर चाहे आप नौकरी करें या व्यापार करें.सदैव ध्यान रखें कि परमपिता परमात्मा ने आपको जो जन्म दिया है उसके लिए व्यापार करना ,नौकरी करना सिर्फ अपने जीवन को चलाने के लिए जो मूलभूत सुविधाएं हमें चाहिए उनका एक जरिया मात्र है .हमारे कंधों पर एक और भार परमपिता परमात्मा ने डाला है और वह यह कि हम हमारे समाज ,हमारे देश और  संपूर्ण धरती के प्रति समर्पित रहे और उसकी बेहतरी के लिए अपना जो भी  योगदान दे सकते हैं चाहे वो छोटा हो या बड़ा हो वह अवश्य दें.

सत्यार्थी जी मैं नोएडा व्यूज की पूरी टीम की तरफ से आपके उज्जवल भविष्य की कामना करते हुए आपको खूब खूब शुभकामनाएं देता हूँ कि आप जीवन के हर क्षेत्र में तरक्की करें और समाज के लिए इसी प्रकार अपना योगदान देते रहें.

मैं नोएडा व्यूज की पूरी टीम को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने मुझे इस लायक समझा कि मैं अपने विचार आपके समाचार पत्र मैं रख सकूं. नोएडा व्यूज बड़ी बेबाकी से सटीक और सामाजिक हित के मुद्दों को उठाता रहता है मैं उसके लिए भी इसकी पूरी टीम को शुभकामनाएं देता हूं.

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