रक्तचाप,भाग २-ठीक करने के उपाय

टीकम सिंह:-

पिछले अंक में हमने बात की कि क्यों लोगों का रक्तचाप बढ़ा हुआ है और इसे नजर अंदाज करना क्यों खतरनाक है। इस अंक में हम बात करेंगे कि रक्तचाप को पूरी तरह से ठीक कैसे किया जा सकता है।

जी हाँ, इसको पूरी तरीके से ठीक किया जा सकता है लेकिन इसके लिए हमें इसकी तह में जाना होगा यानी इसकी जड़ पर वार करना होगा। और इसकी जड़ पर वार करने के लिए चार चीजों पर काम करने की आवश्यकता।

१-चिंता
२-नमक
३-कडक रक्तधमनियाँ
४-खून का गाढापन

अलग-अलग लोगों में अलग-अलग कारण हो सकते हैं लेकिन ज्यादातर लोगों में उपरोक्त सभी कारण होते है इसलिए हमें इन सभी पर काम करना होगा। हम एक-एक कर सभी पर बात करेंगे.

तो आइए सबसे पहले बात करते हैं चिंता की. आजकल लोगों के जीवन में चिंता बहुत बढ़ गई है. और रक्तचाप का चिंता से सीधा संबंध है. अब चिंता को दूर करना आसान काम नहीं है कि यहां आपने बोला और वहां आपकी चिंता दूर हो गई।लेकिन यदि आप निम्न लिखित तीन बातो को अपने जीवन में उतार लें तो चिंता को काफी हद तक दूर कर सकते है:-

१-शरीर से आलस को त्याग दें अौर शारीरिक श्रम करें।धूप का आनन्द लें,उसमें जाने से बिलकुल न घबरायें।यदि आप शारीरिक श्रम करते है तो आप आसानी से तनावमुक्त हो सकते हैं।तो कुछ काम करें और इसके लिए सबसे अच्छा ये है कि आप अपने घर का झाडू-पौंछा स्वयं से करें।आप करके देखिए आप पाएंगे कि आपका तनाव दूर हो रहा है. बहुत शांति मिलेगी,बहुत सुकून मिलेगा।तो शर्माए नहीं इसे करके देखें।

२-रोज सुबह सूर्य निकलने के बाद कम से कम आधा घंटा सूर्य स्नान करें ।ऐसा करने से भी आप देखेंगे कि आपका तनाव दूर हो रहा है। सूर्य स्नान बिना कपड़ों के करें तो परिणाम अद्भुत आते हैं.

३- मन में यदि कोई भी गुबार है,कोई भी भाव है तो उसे दबाएं नहीं बल्कि प्रकट करें ।आप चीखें, चिल्लाए ,झगड़े और यदि आवश्यक हो तो रिश्ते भी तोड़ दें लेकिन गुबार को अपने अंदर दबाकर न रखें. नैतिकता के चक्कर में ना पड़ें और आदर्शों के गुलाम न बने. लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि आप अनैतिक हो जाएं ।बस यह ध्यान रखें कि पूरी तरह से नैतिक होना भी अप्राकृतिक है तो मुखौटा पहनना छोड़ें और आप जैसे हैं वैसे ही रहे। नैतिकतावादी लोगों में ज्यादा तनाव और रक्तचाप पाया जाता है।

अब बात करते हैं नमक की। हमारे देश में नमक के कारण बहुत लोगों का रक्तचाप बढ़ा हुआ है. चूँकि हमारा देश एक गर्म देश है और गर्म देश होने के कारण लोगों को ज्यादा पसीना आता रहा है जिससे शरीर से नमक बाहर निकलता रहा है ।पेशाब के मुकाबले पसीने से ज्यादा मात्रा में नमक शरीर से निकलता है। तो हम लोगों को ज्यादा नमक की जरूरत रही है तो इसलिए हमारा जो खान पान रहा उसमें खूब नमक और सोडा रहा और इससे कोई दिक्कत भी नहीं थी क्योंकि हम खूब पसीना निकाल रहे थे ।लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं ।हम खूब कूलर और एसी का इस्तेमाल करते हैं और अब उतना पसीना नहीं बहाते ।बल्कि पसीने को अब हम थोड़ा असभ्य भी मानने लगे हैं ।तो इसका नतीजा यह रहा है कि हमारे शरीर में नमक इकट्ठा होना शुरू हो गया है।शरीर में नमक इकट्ठा न हो तो हमें इस पर दो प्रकार से काम करना चाहिए ।एक तो यह है कि हमें नमक का इस्तेमाल कम करना चाहिए तो चाट-पकोड़े,समोसे,पापड़,अचार,ब्रेड, बिस्कुट,नमकीन और तले हुए पदार्थों को तुरंत खाना बंद कर दें और बेहतर होगा कि यदि नमक को भी कुछ हफ्तों के लिए पूर्ण रूप से बंद कर दें। और दूसरी बात यह है कि नमक को शरीर से बाहर निकालें ।नमक निकलता है पसीने से और पसीना आता है गर्मी झेलने से. यहां पर आपको यूरोप के लोगों से दो आदतें सीखनी चाहिए कि शरीर से पशीना बाहर कैसे निकाले। उन्होंने शरीर से पसीना निकालने के लिए स्वेटर का आविष्कार किया।जी हाँ स्वेटर का आविष्कार शरीर से पसीना बाहर आए इसलिए हुआ था ना कि ठंड से बचने के लिए ।स्वेट का अर्थ ही होता है पसीना और इसी से उसका नाम पड़ा स्वेटर और दूसरा काम वो करते है सोना बाथ लेने का।सोना बाथ में भी शरीर से पसीना निकलता है और इस सोना बाथ पर यूरोपवासी काफी पैसा खर्चते हैं।

अरे अपना तो देश ऐसे ही गर्म है अौर गर्मियों में तो पूरा देश ही सोना बाथ बन जाता है। तो मैं कहूंगा कि इस गर्मियां चुके नहीं,एसी बन्द करे,कूलर बन्द करें,पँखा बन्द करें.जमकर पानी पीयें अौर जमकर पसीना निकालें।आप महसूस करेंगे कि आपका रक्तचाप ठीक हो रहा है।

अब आते हैं कडक या संकरी हो चुकी रक्तधममनियों पर।हमे इन्हे ठीक करना होगा,नया करना होगा।धमनियों को नया करने का सबसे बेहतर तरीका है ऑटोफेजी.चूँकि रक्तधमनियो का कडक हो जाना थोडा गहन विषय है तो हमे इसके लिए गहन ऑटोफेजी करनी होगी और इसके लिए दस दस दिन के दो उपवास करने होंगे। लेकिन यदि आप दवाईयाँ ले रहे है तो उपवास डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह और निगरानी में ही करें।

ऑटोफेजी करने से खून नया हो जाता है और उसका गाढ़ापन और चिपचिपापन भी खत्म हो जाता है।लेकिन खून के गाढेपन और चिपचिपेपन को कम करने का एक और भी तरीका है और वह है रक्तदान करना ।जब आप रक्तदान करते हैं तो नया खून बनता है और वह उतना गाढ़ा और चिपचिपा नहीं होता है तो आप रक्तदान करें.

तो आप समझे कि रक्तचाप(BP) बहुत लोगों का बढ़ा हुआ है ।यदि आपने अपना रक्तचाप चेक नहीं कराया है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप ठीक हैं।अपना रक्तचाप चेक कराइए और देखिए कि कहीं ये सच में बढा हुआ तो नहीं है ।

“नई गाइडलाइंस के हिसाब से आदर्श रक्तचाप 105 /70 और 120/80 तो अधिकतम का स्तर है ।रक्तचाप को चेक करें कि कहीं वह बढ़ा हुआ तो नहीं है, इसको बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें क्योंकि बढ़ा हुआ रक्तचाप आपके लिए बेहद खतरनाक है।इससे किडनी खराब हो सकती है, लिवर खराब हो सकता है और हृदय की गति भी रुक सकती है।तो इस को नजरअंदाज नहीं करें और यह ऐसी चीज है जिसको जीवनशैली को ठीक करके हमेशा के लिए खत्म किया जा सकता है ।तो इसको हमेशा के लिए ठीक करें। इस मौके को जाने ना दें और इन गर्मियों का भरपूर लाभ उठाएं।अपना रक्तचाप ठीक कर ले।”

(लेखक प्राकृतिक जीवनशैली के जानकार हैं)

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