रक्तचाप/भाग १ – क्या और क्यों?

खून हमारे शरीर का सप्लाई एजेंट है और इस का प्रेशर एक बहुत ही महत्वपूर्ण पैरामीटर है।अगर ब्लड प्रेशर कम हो तो शरीर मे सप्लायी ठीक से नहीं पहुंचती है और अगर प्रेशर ज्यादा हो जाए तो शरीर में टूट-फूट हो सकती है,लीकेज हो सकती है।आज हम इसी महत्वपूर्ण पैरामीटर पर बात करेंगे।
तो आइए सबसे पहले जान लें कि ब्लड प्रेशर होता क्या है? हमारा यह जो दिल है वह एक पंप है जो खून को पूरे शरीर में घूमाता है।तो जब यह कॉन्ट्रैक्ट होता है और एक्सपैंड होता है तो ब्लड घूमता है हमारी आर्टरीज में, जब ब्लड आर्टरीज में घूमता है तो आर्टरीज की दीवारों पर एक प्रेशर लगता है उस प्रेशर को ही ब्लड प्रेशर कहते है.

तो जब दिल कॉन्ट्रैक्ट होता है यानी खून भेजता है उस समय के प्रेशर को कहते हैं सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर और जब दिल एक्सपैंड होता है यानी खून ग्रहण करता है तो उस समय के प्रेशर को कहते हैं डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर।
अब यह प्रेशर इस बात पर निर्भर करता है कि कितने खून की आवश्यकता है. यदि ज्यादा खून की आवश्यकता है तो दिल ज्यादा खून पंप करेगा, जैसे यदि आप कसरत कर रहे हैं ,दौड़ रहे हैं तो ज्यादा खून पंप किया जाएगा और यदि आप सो रहे हैं तो कम खून पंप किया जाएगा।तो यह स्थिति के हिसाब से खून की आवश्यकता घटती बढ़ती रहती है लेकिन इसका जो प्रेशर है वह एक सीमित दायरे में रहना चाहिए और इसको ज्यादा घटना बढ़ना नहीं चाहिए. और इस दायरे को मेंटेन करने का जो कार्य करती हैं वह हमारी आर्टरीज हैं क्योंकि आर्टरीज की जो दीवारें हैं वह लचीली होती हैं।तो खून कम जा रहा हो या ज्यादा जा रहा हो वह कोशिश यह करती हैं के खून का दबाव सीमित दायरे में रहे.

तो आइए अब हम बात कर लेते हैं कि ब्लड प्रेशर की नॉर्मल वैल्यू क्या है?
90 से 120 का सिस्टोलिक और 60 से 80 का डायस्टोलिक एक नॉर्मल रेट मानी जाती है. हालांकि यह मानते हैं कि 120/80 का ब्लड प्रेशर अच्छा होता है लेकिन वास्तव में ब्लड प्रेशर की जो आदर्श स्थिति है वह 105/70 है.

अभी हाल ही में हाइपरटेंशन की डेफिनेशन चेंज हुई है. पहले यह मानते थे कि 140/90 तक आपको ब्लड प्रेशर की दवाई खाने की आवश्यकता नहीं है, थोड़ा ब्लड प्रेशर ज्यादा तो है लेकिन दवाई की आवश्यकता नहीं है लेकिन अभी डेफिनेशन चेंज हुई है और नई डेफिनेशन यह कहती है कि 80 के ऊपर का डायस्टोलिक नहीं होना चाहिए। बल्कि 140/90 तो हाइपरटेंशन की दूसरी स्टेज है तो आपका जो डायस्टोलिक है वह 80 के ऊपर नहीं होना चाहिए. तो यदि इस नई डेफिनेशन के हिसाब से देखें तो दुनिया के करीब करीब आधे से ज्यादा लोगों को हाइपरटेंशन है. अब सवाल उठता है कि इतने सारे लोगों में हाइपरटेंशन कैसे हो गया? तो इसके 2 बड़े कारण हैं. पहला कारण है कि लोगों के शरीर में बल्कि मैं तो कहूंगा कि उनके दिमाग में बहुत सारा कचरा जमा हो गया है और यह कचरा नॉर्मल ब्लड फ्लो में रुकावट डालता है और दूसरा कारण यह है कि हमारी जो आर्टरीज हैं उनमे रेजिडिटी आ गयी है बल्कि मैं तो कहूंगा कि हमारे दिमाग में भी रेजिडिटी आ गई है. तो यह जो रेजिडिटी है और यह जो कचरा है यह दोनों मिलकर खून में हाइपरटेंशन पैदा करता है और यह जो हाइपरटेंशन होना है यह हमारे शरीर की इराप्टम मैकेनिज्म है क्योंकि अब शरीर में खून की आवश्यकता तो है लेकिन यदि रुकने में ,जाने में ,चलने में परेशानी हो रही है तो लाजमी है कि ब्लड का प्रेशर बढ़ जाएगा तो हाइपरटेंशन होना हमारे शरीर की इराप्टम मैकेनिज्म है ।लेकिन यह मैकेनिज्म ठीक नहीं है क्योंकि यदि लंबे समय तक प्रेशर बढ़ा रहता है तो शरीर में टूट-फूट हो सकती है और ब्रेन हेमरेज भी हो सकता है ,किडनी फेलियर हो सकता है ,हार्ट फेल हो सकता है. तो इसको सीमित रखने के लिए हम दवाइयां लेते हैं. बीपी कम करने की दवाइयां लेते हैं, कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए स्टेटिंस लेते हैं, खून को पतला करने के लिए एस्प्रिन लेते हैं लेकिन इनकी अपनी समस्याएं हैं. यह जो इकोएस्प्रिन है इससे कई दफा ब्रेन हेमरेज हो जाता है कोलेस्ट्रॉल कम करने की दवाई दिल को कमजोर करती हैं और यह जो बीपी कम करने की दवाइयां हैं इनका मैकेनिज्म है कि यह अक्सर दिल की पंपिंग है उसको कम कर देती. तो कुल मिलाकर जो कार्डिएक आउटपुट है वह कम हो जाता है और यह जो ब्लड आउटपुट कम होने से होता यह है कि शरीर में सब जगह बराबर खून नहीं पहुंचता है। और इस खून नहीं पहुंचने से कई समस्याएं होती हैं. अभी हाल में 3 बहुत चौंकाने वाली रिपोर्ट आयी है. पहली जो रिपोर्ट आई है वह यह कहती है कि BP की दवाइयां मौत के खतरे को बढ़ा देते हैं जी हां मैं सही कह रहा हूं ये दवाइयां आपको मौत के मुंह तक ले जा सकती हैं ।दूसरी रिपोर्ट यह कहती है कि इन दवाओं से कैंसर भी हो सकता है और तीसरी रिपोर्ट यह कह रही है कि इन दवाओं से डिप्रेशन हो सकता है.

तो अब सवाल यह उठता है कि यदि BP की दवाई इतनी खराब है तो क्या उन्हें बंद नहीं कर देना चाहिए ?
तो मैं कहता हूं कि बिलकुल नहीं क्योंकि यदि आप अचानक BP की दवाई बंद कर देते हैं तो इससे बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। हार्ट अटैक हो सकता है, किडनी फेलियर हो सकता है ,ब्रेन हेमरेज हो सकता है ,कुछ भी हो सकता है ।बीपी की दवाइयां अचानक से बंद नहीं करनी चाहिए ।करना यह चाहिए कि हम अपना लाइफ स्टाइल सुधार करके अपना BP परमानेंटली ठीक कर ले। हां जी आप बिल्कुल ठीक पढ रहे हैं कि ब्लड प्रेशर परमानेंटली ठीक हो सकता है ।वैसे ही जैसे शरीर का कोई भी विकार ठीक हो सकता है।यह परमानेंटली ठीक कैसे होगा इसके बारे में बात करेंगे हम अगले अंक में.

(टीकम सिंह,प्राकृतिक जीवन शैली विशेषज्ञ)

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