राजनीति के भीष्म पितामह का जाना पूरे विश्व को रुला गया।

 

भारतीय राजनीति के भीष्म पितामह कहे जाने वाले श्री अटल बिहारी वाजपेयी विश्व मे अपने करोडो चाहने वालों को रोता छोडकर दुनिया से विदा हो गये।भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी उच्छ कोटि के कवि ,पत्रकार व प्रखर वक्ता भी थे।उन्होने अपनी गठबन्धन की सरकार को भी इस धाक के साथ चलाया जैसा कोई पूर्ण बहुमत की सरकार को भी नही चला पाता।चाहे पोखरण परीक्षण हो जिस पर विश्व के प्रतिबन्ध के बाद भी वो अपने निर्णय पर अटल रहे अौर सफल परीक्षण करके विश्व को अपने कदमो मे झुकाना हो,चाहे प्रधानमंत्री सडक योजना से पूरे देश को जोडना हो ऐसे अनेको काम अटल जी ने किये जिसने देश की विश्वपटल पर अपनी धाक बनायी अौर देश को अग्रणी पंक्ति मे ला खडा किया।

25 दिसंबर 1925 को ग्वालियर में जन्मे अटल जी तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे।वे पहले 16 मई से 1 जून 1996 तथा फिर 19 मार्च 1998 से 22 मई 2004 तक भारत के प्रधानमंत्री रहे।
वे भारतीय जनसंघ की स्थापना करने वाले महापुरुषों में से एक हैं और 1968 से 1973 तक उसके अध्यक्ष भी रहे। वे जीवन भर भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे। उन्होंने लम्बे समय तक राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक पत्र-पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया। उन्होंने अपना जीवन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प लेकर प्रारम्भ किया था और देश के सर्वोच्च पद पर पहुँचने तक उस संकल्प को पूरी निष्ठा से निभाया। वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के पहले प्रधानमन्त्री थे जिन्होंने गैर काँग्रेसी प्रधानमन्त्री पद के 5 साल बिना किसी समस्या के पूरे किए। उन्होंने 24 दलों के गठबंधन से सरकार बनाई थी जिसमें 81 मन्त्री थे। कभी किसी दल ने आनाकानी नहीं की। इससे उनकी नेतृत्व क्षमता का पता चलता है।

अटल जी के बारे में लिखने में मेरी कलम अौर सोच सब कम पड रहें हैं क्योंकि उनको शब्दो मे समेट पाना नामुमकिन सा प्रतीत हो रहा है।सिर्फ इतना ही कहूँगा कि “दाँव पर सब कुछ लगा है, रुक नहीं सकते;
टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते।”

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