सात फेरों पर भी भारी भ्रष्टाचार

सात फेरों का पवित्र बन्धन पति पत्नि के रिश्तों का आधार होता है परन्तु कुछ सरकारी धन को पाने के लिए गौतमबुद्धनगर जिले के चीती गाँव के कुछ जोडो ने दोबारा ब्याह रचा लिया।
ज्ञात रहे कि 24 फरवरी 2018 “मुख्यमन्त्री सामूहिक विवाह योजना” के तहत गरीब लडकियों के विवाह लिए सामूहिक विवाह का आयोजन ग्रेटर नोएडा के वाइएमसीए मे हुआ था।इस योजना के तहत प्रशासन ने गरीब लडकियों के विवाह के साथ साथ 20 हजार रुपये नकद व अन्य घरेलू सामान दिया गया था ताकि वो अपना वैवाहिक जीवन शुरु कर सकें।परन्तु मुख्यमन्त्री की इस लोककल्याण की योजना पर पलीता लगाने का आरोप प्रशासनिक अधिकारियों,ग्राम प्रधान व शादीशुदा जोडो पर लग रहा है।

हकीकत क्या है ये तो निष्पक्ष जाँच के बाद ही पता लग पायेगा परन्तु निष्पक्ष जाँच होगी इसकी संभावना कम ही है क्योंकि अभी तक तो ग्राम प्रधान पति(जिन पर शादी के लिए जोडे तलाशने का प्रशासनिक दबाव था) और दोबारा शादी करने वाले दो लोगों (जिन्हे मामले की गंभीरता का शायद ज्ञान नही था) को ही गिरफ्तार किया है जबकि इस आयोजन की जिम्मेदारी मंत्री,विधायक,प्रशासनिक अधिकारियों पर थी।वास्तव में कार्यवाही उन लोगों पर होनी चाहिए जो इसके जिम्मेदार है ना कि बडी मछलियों को बचाने के लिए छोटी मछलियों को फँसा देना चाहिए।
सबसे ज्यादा हैरान करने वाला बयान रमापति शास्त्री ,मंत्री ,समाज कल्याण विभाग का आया है जो इस घटना को छिटपुट गडबडी बताकर अपना पल्ला झाड रहे हैं।उम्मीद है मुख्यमंत्री मामले की गंभीरता को देखते हुए उचित कार्यवही

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