क्या आप भी है कॉफी के शौकीन तो जानिए इससे होने वाले नुकसान

भारत में अधिकतर लोगों के दिन की शुरुआत कॉफी से ही होती है, वहीं कुछ लोग सिर दर्द होने पर भी कॉफी का सहारा लेते हैं | लेकिन क्या आप जानते है कॉफी पीना कितना हानिकारक है | एक स्टडी की रिपोर्ट के मुताबिक, जो लोग दिन में 6 कप या इससे ज्यादा कॉफी पीते हैं उन्हें दिल की बीमारी होने का खतरा बना रहता है | यह हर व्यक्ति के मेटाबॉलिक रेट पर निर्भर करता है |कई स्टडी की रिपोर्ट में बताया गया है कि कैफीन में एंटी-ऑक्सीडेंट्स पाए…

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क्या आप भी खा रहे है फलो के नाम पर जहर

गर्मी के मौसम आते ही सभी लोगो का मानना है की तरबूज और पपीता जैसे फल खाने चाहिए जिससे पानी की कमी  दूर होती है , लेकिन क्या आप जानते है कि  आज के समय में यह खाना भीसेहत के लिए हानिकारक हो सकता है क्यूकि आज के समय में ज्यादतर फल केमिकल के जरिए पकाए जाते हैं। इन फलो को पकने के लिए घातक केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है।इसलिए इस खबर के जरिये हम आपको बताना चाहते है कि जब भी आप फल खरीदने जाएं तो कैसे पहचाने कि फल केमिकल्स द्वारा पकाया गया है या फिर प्राकृतिक तरह से पकाया गया है। केमिकल्स द्वारा पकाए गए फलों पर धब्बा और आर्टिफिशियल चमकीला रंग लगाया जाता है । इसके इस्तेमाल से दो से तीन दिन के भीतर ही फलो  का रंग पीले से काला होने लग जाता है |अक्सर देखा गाया है की कार्बाइड से पकाए फलो  का स्वाद बीच में से  मीठा और किनारे से कच्चा होता है। इसलिए जिन  फल-सब्जी पर दाग दबे हो उन्हें  न  खरीदें।फलों को समय  से पहले पकाने के लिए केमिकल्स का उपोयग  किया जाता है। इसके अलावा फलों का  वजन बढ़ाने के लिए भी केमिकल्स का उपयोग किया जाता है। फलों व सब्जियों को…

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एलईडी लाइट पहुँचा सकती है आँखो को नुक्सान

फ्रांस की सरकार द्वारा संचालित स्वास्थ्य प्रहरी ने कहा, एलईडी लाइटिंग में “नीली रोशनी” आंख की रेटिना को नुकसान पहुंचा सकती है और प्राकृतिक नींद की लय को बिगाड़ सकती है, नए निष्कर्ष पहले की चिंताओं की पुष्टि करते हैं कि “एक गहन और शक्तिशाली [एलईडी] प्रकाश के संपर्क में ‘फोटो-टॉक्सिक’ है और रेटिना कोशिकाओं की अपरिवर्तनीय हानि और दृष्टि की तीक्ष्णता को कम कर सकता है,” खाद्य, पर्यावरण और व्यवसाय स्वास्थ्य के लिए फ्रांसीसी एजेंसी सुरक्षा ने एक बयान में चेतावनी दी। एजेंसी ने 400-पृष्ठ की रिपोर्ट में सिफारिश…

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नजरअंदाज न करे कमर के दर्द को

स्वास्थ्य: पीठ के निचले हिस्से में दर्द एक बहुत ही आम मुद्दा है और कई कारणों से हो सकता है। हालांकि, इसका एक मुख्य कारण लिगामेंट स्ट्रेन या बैक मसल्स स्ट्रेन है। बहुत भारी वस्तुओं को उठाने, अत्यधिक कठोर कार्य करने या अचानक मुड़ने के कारण सूक्ष्मदर्शी आंसू या स्नायुबंधन का अत्यधिक खिंचाव हो सकता है। इन स्थितियों में 30 और 60 वर्ष की आयु के बीच के व्यक्तियों द्वारा अनुभव किया जा सकता है। पीठ के निचले हिस्से में दर्द के अन्य कारणों में पीठ की चोट, गठिया के…

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सोना खरीदने के लिए हो जाये तैयार 7 मई को है अक्षय तृतीया

इस साल अक्षय तृतीया 7 मई को है। इस खास दिन पर, सोने की दुकानों में बहुत अधिक भीड़ देखी जाती है। इस विशेष अवसर पर गोल्ड खरीदने का बहुत महत्व | यदि आप इसके पीछे का कारण नहीं जानते हैं कि इस महान दिन पर कुछ भी खरीदना महत्वपूर्ण क्यों है तो आईये आपको बता देते है कि इस दिन का बहुत अधिक महत्व क्यों है। ज्योतिष के अनुसार,यह दिन शुभ है और इस दिन सोना खरीदने से व्यक्ति के भाग्य के दरवाजे खुल सकते हैं। अक्षय तृतीया पर…

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कोका कोला मतलब ठण्डा जहर!

ग्रेटर नोएडा।टीकम सिंह : जब भी कहीं जाता हूँ तो देखता हूँ कई हाईप्रोफाइल लोग/स्टूडेंट नाश्ता करते समय एक हाथ मे समोसा तो एक हाथ में कोल्डड्रिंक लिए बैठे दिखते है, थोड़ा पीते हैं फिर खाते, कुछ तो खाना खाते समय भी इसका ऐसा ही उपयोग करते हैं. गाँव के लोग तो बस गर्मी के दिनों में पीते है पर शहरों में तो यह वर्ष भर बिकने वाला पेय बन चुका हैं.वैसे मैं भी सात-आठ वर्ष पहले इसे पीया करता था लेकिन जब राजीव भाई दीक्षित को सुना तो इसका…

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वजन घटाना है तो खाये ये सब्जी

आज कल लोगो के बच तेजी से बढ़ता मोटापा की समस्या बहुत सुनने में आ रही है | जिस का विशेष कारण है बहार का खाना और गलत दिनचार्य है | यदि आप कम कैलोरी वाले आहार ले रहे हैं और रोज एक्सरसाइज भी कर रहे है उसके बावजूत आपको वो रिजल्ट नहीं मिल रहा जिसके आप हकदार है | तो आप अपने आहार में कुछ इन लो-कैलोरी वाली सब्जियों को शामिल कर सकते हैं जिससे आप जल्दी ही रिजल्ट देख सकते है | ब्रोकली ब्रोकोली एक वजन घटाने के…

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हमारा भगवान कौन है?

क्या अर्थ डे मनाने से पर्यावरण संरक्षण हो पायेगा ? हमारे अस्तित्व का निर्माण पंच महाभूतों से मिलकर हुआ है। जिन्हे हम भगवान कहते हैं। भ से भूमि,ग से गगन,व से वायु,अ से आग और न से नीर। यही हमारे पंचतत्व हैं,हमारे भगवान है। भारतवासी सदियों से प्रकृति को भगवान मानकर पूजते रहे और उसका संरक्षण व संवर्द्धन करते रहे लेकिन जब से मैकाले की शिक्षा पद्धति भारतवर्ष में लागू की गयी और यहाँ के लोगो ने उसे आत्मसात करना शुरु किया तो प्रकृति के प्रति प्यार और सम्मान घट…

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