भारत में पेट्रोल पर चीन-पाक से भी ज्यादा टैक्स वसूलती है सरकार!

‘इंटरनेशनल क्रूड ऑयल के दाम भले ही मोदी सरकार के गद्दी संभालने के बाद से आधे हो गए हों, लेकिन वास्तव में उपभोक्ताओं पर इसका कोई असर व्यावहारिक तौर पर नहीं पड़ा है.’ यह विषम परिस्थिति उस दिशाहीन कर नीति को उजागर करती है जिसने ऑयल सेक्टर को सरकार के लिए दुधारू गाय बना रखा है.

पेट्रोल पर 58 फीसदी और डीजल पर 50 फीसदी टैक्स
पेट्रोलियम की कीमतों को लें. जब नरेंद्र मोदी अप्रैल 2014 में मनमोहन सिंह सरकार पर हमला कर रहे थे कि उन्होंने लोगों का जीना मुश्किल दिया है, तब पेट्रोल पर टैक्स 34 फीसदी था और डीजल पर यह बमुश्किल 21.5 फीसदी था. लेकिन जुलाई 2017 में पेट्रोल पर टैक्स 58 फीसदी और डीजल पर 50 फीसदी के स्तर को भी पार कर चुका है.

भारतीय तेल की कीमतों की तुलना किस तरह अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ की जा सकती है, जहां प्रति व्यक्ति आय (क्रयशक्ति के आधार पर) 60 हजार डॉलर के आसपास होती है. यहां पेट्रोल  कि औसत कीमत 0.70 डॉलर प्रति लीटर (11 सितंबर की क़ीमत) है. कोई भी पता कर सकता है कि सर्वाधिक विकसित पश्चिमी देशो में भी पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत लगभग समान है.

सबसे ज्यादा टैक्स ले रही है हमारी सरकार
भारत के मामले को लें. हमारी प्रति व्यक्ति आमदनी प्रति व्यक्ति क्रयशक्ति को आधार मानते हुए 6000 डॉलर से थोड़ा ज्यादा है. लेकिन, हमारी सरकार अपने नागरिकों को पेट्रोलियम उत्पाद 1.25 डॉलर प्रति लीटर (वर्तमान विनिमय दर के मुताबिक 80 रुपये) की दर से बेचती है.
हमारी सरकार यहां तक कि गरीब दक्षिण एशियाई देशों से भी बदतर साबित हुई है. पाकिस्तान का उदाहरण लें, जिसका हमारे कई ‘अति राष्ट्रवादी’ मजाक उड़ाते हैं. पाकिस्तान, जहां प्रतिव्यक्ति आय (क्रयशक्ति के आधार पर) लगभग 5500 डॉलर (भारत से कम) है, अपने नागरिकों को 71 पाकिस्तानी रुपए में पेट्रोल बेचता है जो महज 0.67 अमेरिकी डॉलर के बराबर है. अब पाकिस्तान की तुलना हम अपने देश से करें, जिसे विकास के मामले में चमत्कार दिखाने वाला माना जाता है. पाकिस्तान से अमीर देश होने के बावजूद हमारी सरकार अपने नागरिकों पर पाकिस्तान के मुकाबले दुगुना टैक्स लगाती है. ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान अकेला ऐसा उदाहरण है. श्रीलंका, नेपाल या बांग्लादेश के मामलों को भी लें, हमारी लुटेरी सरकार का किसी देश से मुकाबला नहीं है.

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