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ट्यूशन टीचर और उनका अस्तित्व।

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नॉएडा : समय की मांग और लोगों के बच्चों के जरूरत के अनुरूप ट्यूशन टीचर का प्रादुर्भाव हुआ । पहले थोड़े बहुत होते थे आज के समय में बढती बेरोजगारी को देखते हुए पढ़ें लिखे लोगों ने इसे जीने का एक जरिया बनाया परिवार चलाने के लिए ।इसमें बढ़ते स्कोप और हर माता-पिता की अपने बच्चों को पढाने की चाह ने उन्हें ऐसा करने को लेकर प्रेरित किया । आज से १५-२० साल पहले बहुत कम लोग घर में शिक्षकों को बुलाया करते थे पर धीरे-धीरे बच्चों के अच्छे भविष्य को देखते हुए अमूनन हर माता पिता आज के समय में इनकी सेवाएं लेतें हैं । विपरीत परिस्थितियों में भी अच्छे ट्यूशन टीचर बच्चों के भविष्य के प्रति और अच्छे पैसों की आस में खूब मेहनत करके बच्चों को सही दिशा दिखाने में पूर्ण रूप से सक्षम होतें हैं। माता पिता भी इसलिए खुश रहतें हैं कि बच्चे कहीं भटक नहीं रहे क्योंकि अक्सर ऐसा देखा जाता था कि बच्चे ट्यूशन पढ़ने जाने के बहाने लम्बे समय तक दोस्तों के साथ रहकर समय बर्बाद किया करते थे इससे काफी हद तक माता पिता को निजात मिल गई थी । बदलाव एक प्रक्रिया है । आज के समय में हरेक सोसायटी में ऐसे शिक्षक आसानी से मिल जातें हैं । पर एक मायने में देखा जाए तो इनका अस्तित्व ना के बराबर है । सरकार को ये टैक्स भी देतें हैं। पर सरकार की नजर कोई अस्तित्व नहीं । समाज में भी माता पिता इनका नाम लेने से घबराते हैं। उनकी नजर में बच्चों की मेहनत होती है। स्कूल चाहे जैसा भी पढाये पर सख्त हिदायत होती है बच्चों को ट्यूशन ना पढाया जाए । ये अलग बात है कि कुछ स्कूल टीचर ही ट्यूशन देतें हैं। पर अगर बच्चों के नंबर कम आए तो यही सबसे पहले निशाने पर होतें हैं । स्कूल वालों को कोई कुछ नहीं कहता उल्टा स्कूल वाले ही माता-पिता को अक्सर ये आभास दिलातें हैं कि आपका बच्चा पढ़ नहीं रहा । आखिर ऐसा क्यों? समझ से परे । आज के इस पेंडेमिक के दौर में सबसे ज्यादा प्रभावित लोगों मे़ इनका नाम आता है । कईयों ने खुद को मौत के गले लगाना बेहतर समझा । सरकार को कोई परवाह नहीं इनकी । ये खुद्दार होतें हैं अपने मेहनत से जीना चाहतें हैं इसलिए कहीं हाथ भी फैलाना बेहतर नहीं समझतें हैं। तो फिर जेहन में एक सवाल आती है क्यों इनकी परवाह करने वाला कोई नहीं क्यों सरकार इनके बारे में नहीं सोचती । सवाल हैं सवाल ही रहेंगें और इसका जबाब शायद किसी के पास नहीं । बच्चों के जीवन को सुधारने वाले ये खुद के जीवन को आज के इस दौर में दांव पर लगा रहें हैं। जिसने बच्चों के भविष्य बनाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया हो उनके साथ ये नाइंसाफी क्यों? जरा सोचिए और कृपया इनके भविष्य इनके बच्चों के भविष्य के बारें में भी हमें आत्ममंथन की जरूरत है । ये खुद्दार हैं खुद आगे आकर आपसे कुछ नहीं बोल पाऐंगें हमें ही इनके लिए सरकार से गुजारिश करनी होगी । जिसने हमारे बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए खुद को समर्पित किया है उनके लिए हमें भी सोचने की जरूरत है ।

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