RAID हौसले और ईमानदारी की कहानी है : अजय देवगन

नॉएडा व्यूज : आज अजय देवगन की फिल्म बड़े पर्दे पर रिलीज हुई है. कई बार बड़े पर्दे पर एक ईमानदार और बहादुर सरकारी अफसर का किरदार निभा चुके अजय एक बार फिर ऐसे ही किरदार में नजर आ रहे हैं.  लेकिन इस बार उनका ये अवतार पिछले किरदारों से थोड़ा अलग है और इस बार उनके किरदार की खास बात ये है कि पिछली फिल्मों में पुलिस की वर्दी में नजर चुके अजय इस बार बिना वर्दी के ही प्रशासन में मौजूद करप्शन के खिलाफ मोर्चा खोलते दिख रहे हैं.

 मूवी कि कहानी :

फिल्म की कहानी इंडियन रेवेन्यू सर्विस के ईमानदार ऑफिसर अमय पटनायक (अजय देवगन) की है. जिसका अपनी ईमानदारी के चलते पिछले सात सालों में इससे पहले 49 बार ट्रांसफर हो चुका है और इस बार उसका ट्रांसफर यूपी के लखनऊ में हुआ है. लखनऊ आते ही अमय की मुलाकात होती है वहां एक बाहुबली सांसद से जो न सिर्फ 3 बार से सांसद है बल्कि इलाके का एक दबंग नेता है जिसका नाम रामेश्वर सिंह है और उसे राजा जी (सौरभ शुक्ल) के नाम से भी जाना जाता है. लखनऊ पहुंच ही अमय को राजा जी के खिलाफ एक टिप (मुखबरी) मिलती है जिसमें टैक्स चोरी और 420 करोड़ रुपए का काला धन होने की जानकारी मिलती है. अमय परत दर परत मुखबरी के आधार पर सारे सबूत जांचता है और टैक्स चोरी को पाता है. इसके बाद वो रेड मारने के लिए ऑडर साइन करवाता है अपनी टीम के साथ चल पड़ता है राजा जी के वाइट हाउस में रेड मारने. इस बीज अमय को अपने ही डिपार्टमेंट में ही कुछ करप्ट अधिकारियों का भी सामना करना पड़ता है लेकिन कहानी के खत्म होते-होते वो लोग भी अमय के साथ हो जाते हैं.

अमय राजा जी के यहां रेड डालने जाता है और रेड शुरू करता है. इस दौरान राजा जी बिल्कुल निश्चिंत होते हैं कि अमय घर में कुछ ढूंढ नहीं पाएगा. लेकिन मजे की बात तो ये है कि खुद राजा जी को ही नहीं पता कि उनके ही परिवार वालों ने उसे धोखा दिया है और उनका घर सोने की लंका में तब्दील हो चुका है. एक-एक कर राजा जी का खजाना इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के ऑफिसर्स के हाथ लगता जाता है. इस बीच राजा जी लगातार रेड रुकवाने की कोशिश करते हैं लेकिन नाकामयाब रहते हैं. फिल्म की कहानी आपको अंत तक बांधे रहेगी एक के बाद एक राजा जी किस हद तक रेड रुकवाने का प्रयास करते हैं कि गूंज दिल्ली तक सुनाई देती है. साथ ही अमय का परिवार जिसमें सिर्फ उनकी पत्नी (इलियाना डिक्रूज) को दिखाया गया है, तक पर हमला होता है. लेकिन मजेदार बात ये है कि आखिर तक आप यही अंदाजा लगाते रह जाएंगे कि आखिर राजा जी की लंका का विभीषण है कौन और जब आपको इसके बारे में पता चलेगा तो आपके सारे कयास गलत साबित होते हैं.
क्यों देखें/ क्यों न देखें

फिल्म की कहानी दिलचस्प है और अंत तक आपको बांधे रखने में कामयाब होती है.

फिल्म आपको एक पल के लिए अकेला नहीं छोड़ती है.

फिल्म में सभी किरदारों का अभिनय काबिल-ए-तारीफ है. ये कहना गलत नहीं होगा कि सभी किरदार एक से बढ़कर एक परफॉर्मेंस दे रहे हैं

फिल्म देखने के बाद आपको सरकारी महकमों में किस तरह काम होता है हमारे देश में ईमानदार होना कितना मुश्किल है ये बताता है. साथ ही ये भी संदेश देता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है.

फिल्म न देखने का कारण केवल ये है कि यदि आपको गंभीर और संस्पेंस टाइप की फिल्में पसंद नहीं है तो ये फिल्म आपके लिए नहीं है.

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