05/20/2022
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विद्याज्ञान ने 2020-21 के एकेडेमिक सत्र के लिए एडमिशन शुरू किए

1. प्रारंभिक लिखित परीक्षा 24 नवंबर, 2019 को होगी।
उत्तर प्रदेश, 2019ः विद्याज्ञान लीडरशिप एकेडमी ने 2020-21 के एकेडेमिक सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है। विद्याज्ञान उत्तरप्रदेश के प्रतिभाशाली, आर्थिक रूप से कमजोर, ग्रामीण विद्यार्थियों के लिए एक निशुल्क आवासीय स्कूल है। विद्याज्ञान में दो राउंड की प्रतियोगी परीक्षा के बाद हर साल प्रवेश के लिए 400 विद्यार्थियों का चयन किया जाता है।
पात्रता के मापदंडः
2. आवेदक किसी ग्रामीण स्कूल के ग्रेड 5 में अध्ययनरत हो।

3. लड़कियों की आयु 13 वर्ष या उससे कम हो तथा लड़कों की आयु 12 वर्ष या उससे कम हो।
4. विद्यार्थी ग्रामीण, कम आय वाले परिवारों से हों (जिनके परिवारों की संयुक्त आय 1 लाख रु. प्रतिवर्ष से ज्यादा न हो)
2009 में स्थापित विद्याज्ञान ने आज तक अनेक विद्यार्थियों एवं उनके परिवारों की जिंदगी बदली है। विद्याज्ञान के विद्यार्थियों का प्रदर्शन एकेडेमिक्स एवं को-करिकुलर गतिविधियों, दोनों में ही उल्लेखनीय रहा है। इस साल स्कूल से 210 विद्यार्थी ग्रेजुएट हुए, जिनका औसत स्कोर 89.3 प्रतिशत रहा। आज विद्याज्ञान के एलुमनी अमेरिका के सर्वोच्च विश्वविद्यालयों जैसे बैबसन काॅलेज, ब्रिन माॅर काॅलेज, यूनिवर्सिटी आॅफ रोचेस्टर एवं हैवफोर्ड काॅलेज में पढ़ रहे हैं तथा उन्हें पूर्ण वित्तीय सहयोग प्रदान किया जा रहा है। अन्य विद्यार्थियों का चयन भारत के प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों, जैसे दिल्ली यूनिवर्सिटी, एनआईटी, जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी आदि में हुआ है। आवेदन करने के लिए, कृपया https://www.vidyagyan.in/ पर जाएं

विद्याज्ञान लीडरशिप अकादमी के बारे में

2009 में शिव नादर फाउंडेशन द्वारा स्थापित विद्याज्ञान में (www.vidyaGyan.in) आज 1900 से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं। इसके उत्तरप्रदेश में दो परिसर, बुलंदशहर और सीतापुर में हैं। इस एकेडमी की शुरुआत उत्तरप्रदेश के गांवों से गरीब समुदाय के प्रतिभाशाली बच्चों का चयन कर उन्हें शिक्षित और विकसित करके गांवों व शहरों के अंतर को दूर करने के लिए की गई थी। पूर्ण आवासीय एकेडमी, विद्याज्ञान में न केवल विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की जाती है, बल्कि उनकी हर जरूरत का ख्याल रखा जाता है। विद्याज्ञान भविष्य के लीडर्स का निर्माण करके सामाजिक असंतुलन को दूर करने का प्रयास करता है। ये लीडर्स अपने परिवारों, समुदायों व समाज के आदर्श बनेंगे। फाउन्डेशन को उम्मीद है कि इससे ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के बीच का अंतर कम होगा तथा समाज के अन्य क्षेत्र भी इस तरह के अभियानों के लिए प्रेरित होंगे।

शिव नादर फाऊन्डेशन के बारे में :
शिव नादर फाऊन्डेशन (www.ShivNadarFoundation.org) विश्व के 44 देशों में 144,000 से ज्यादा कर्मचारियों के साथ 8‐9 बिलियन डाॅलर की अग्रणी ग्लोबल टेक्नाॅलाॅजी एवं आईटी कंपनी है। इसकी स्थापना एचसीएल के फाऊन्डर शिव नादर ने की है। 1976 में स्थापित एचसीएल भारत के ओरिज़नल आईटी गैरेज़ स्टार्टअप्स में से एक है और विविध बिज़नेस संबंधी तकनीकी समाधान पेश करता है, जिनमें संपूर्ण हार्डवेयर और साॅफ्टवेयर स्पेक्ट्रम के साथ औद्योगिक वर्टिकल्स की श्रृंखला शामिल हैं।

यह फाऊन्डेशन व्यक्तियों को सामाजिक-आर्थिक अंतर को दूर करने में समर्थ बनाकर एक बराबरी के और मेरिट पर आधारित समाज के निर्माण के लिए समर्पित है। इस लक्ष्य के लिए यह फाउन्डेशन भारत में ट्रांसफाॅर्मेशनल शिक्षा, रचनात्मकता और कला से संबंधित अविकसित डिसिप्लिनरी क्षेत्रों पर केन्द्रित है।

इस फाऊन्डेशन ने 1996 में एसएसएन इंस्टीट्यूशंस की स्थापना की, जिनमें चेन्नई, तमिलनाडु में भारत का प्रतिष्ठित प्रायवेट इंजीनियरिंग काॅलेज-एसएसएन काॅलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग शामिल है। इस फाउंडेशन ने विद्याज्ञान की स्थापना भी की है, जो उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर एवं सीतापुर में प्रतिभाशाली ग्रामीण बच्चों के लिए आवासीय लीडरशिप एकेडमी है। इसके अलावा यह फाउंडेशन शिव नादर स्कूल भी चलाता है, जो भारत में प्रगतिशील शहरी स्कूलों का नेटवर्क है और बच्चों को ऐसी शिक्षा प्रदान करता है, जो उन्हें जीवनपर्यंत लर्नर्स बनाती है। इस फाउंडेशन ने किरन नादर म्यूज़ियम ऑफ़ आर्ट की स्थापना भी की है, जो आधुनिक और सामयिक कला में भारत का सबसे बड़ा प्राईवेट उदारवादी म्यूज़ियम है। इसका लक्ष्य कला को आम लोगों तक पहुंचाना है।

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