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कर्मठ दीमकखोर और हरामखोर इंसान आरटीआई।

सागर खारी |
पूरी दुनिया में जिस वन्यजीव का सर्वाधिक शिकार तथा जिसके अंगों की तस्करी की जाती है वह पेंगोलिन है। पैंगोलिन प्रकृति इकोसिस्टम का सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्तनधारी जीव है। भारत में इसे दीमकखोर / चींटीखोर कहा जाता है नाम से ही जाहिर है यह प्रकृति में जंगलों में नदियों के खादर में दीमक व चीटियों को खाकर उनकी संख्या को नियंत्रित रखता है । औसत 3 फीट लंबे 10 से 14 किलो वजनी यह शानदार रात्रिचर जीव रात्रि भर में हजारों चीटियों दीमक को चट कर जाता है, इसकी विशेष जीभ इसमें सर्वाधिक मददगार होती है। लेकिन लालची इंसान को इसकी खूबियों प्रकृति पर्यावरण तंत्र में इसके योगदान से क्या ?वह इसका शिकार करता है इसकी शरीर पर बने हुए कठोर कवच जो स्कल से निर्मित होता है उसको प्राप्त करने के लिए। इसके कठोर स्कल से विशेष कोट तथा हेट भी बनाया जाता है।
लाखों में उसकी कीमत होती है अंग्रेज जब भारत आए तो गवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स ने इंग्लैंड के राजा किंग्स जॉर्ज तृतीय को ऐसा ही कोट इंग्लैंड पहुंचकर भेंट किया था। इसमें कोई शक नहीं अंग्रेजों ने भी इसके शिकार को बढ़ावा दिया। ट्रेडीशनल चाइनीस मेडिसिन की यह मान्यता है (जिसकी वैज्ञानिक तौर पर आज तक कोई पुष्टि नहीं है) इसके स्कल गठिया व त्वचा रोगों में इस्तेमाल में लाए जाते हैं। पैंगोलिन अर्थात दीमक खोर की पूरे विश्व में 8 प्रजातियां पाई जाती हैं मांस, स्कल के लिए इसके शिकार के कारण सभी संकटग्रस्त है। चीन वियतनाम में इसका सर्वाधिक आज भी शिकार जारी है ज्यादा खुश हमें नहीं होना चाहिए। अपना भारत भी इस शानदार जीव को लुप्त करने में पीछे नहीं है। भारत में भी इसका सर्वाधिक शिकार होता है। उत्तर पूर्व के राज्यों तमिलनाडु मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में। 3 मार्च 1973 में दुनिया के 100 से अधिक देशों ने एक अंतरराष्ट्रीय संधि पर साइन किए थे जिसे कन्वेंशन ऑन ट्रेड ऑफ इनडेंजर स्पीशीज कहा जाता है जिसके तहत ऐसे संकट ग्रस्त जीवो के शिकार तस्करी पर रोक लगाई गई। लेकिन एशिया अफ्रीका के ज्यादातर देशों में स्थिति आज भी चिंताजनक है ।
वर्ष 2016 में उसी संधि का इस्तेमाल करते हुए पेंगोलिन के शिकार तस्करी व्यापार को लेकर पूर्ण प्रतिबंध के साथ पूरी दुनिया के 186 देश एक जुट हुए । पैंगोली कितना अभाग्यशाली जीव है यह इस तथ्य से पता चलता है इस जीव के लिए प्रत्येक वर्ष वर्ल्ड पैंगोलिन डे बनाया जाता है लेकिन उसे मनाने का आज तक कोई निश्चित दिन नहीं है।अर्थात प्रत्येक वर्ष फरवरी के तीसरे शनिवार को यह दिवस मनाया जाता है इस वर्ष 2021 में 20 फरवरी को वर्ल्ड पैंगोलिन डे मनाया जाएगा। अब अपने भारत में ही इसके शिकार को लेकर चर्चा करते हैं। सूचना के अधिकार कानून के तहत मुझे आज ही “वाइल्डलाइफ क्राईम कंट्रोल ब्यूरो” जो मिनिस्ट्री ऑफ एनवायरनमेंट एंड फॉरेस्ट इंडियन गवर्नमेंट के अधीन एक ऑटोनॉमस डिपार्टमेंट है उससे कुछ चिंताजनक जानकारी मिली है पैंगोलिन को लेकर। भारत में इस जीव की दो प्रजातियां पाई जाती है एक भारतीय पेंगोलिन दूसरा चाइनीज पेंगोलिन दोनों ही शिकार के कारण संकटग्रस्त है। पूरे देश में वर्ष 2015 से लेकर जनवरी 2021 तक 147 पैंगोलिन के शिकार के मामले सामने आए जिसमें 402 शिकारी अर्थात वन्यजीव अपराधियों के विरुद्ध कार्यवाही की गई। साल 2019 में सर्वाधिक 36 मामले पेंगोलिन शिकार के दर्ज किए गए लेकिन सर्वाधिक चिंताजनक जानकारी यह है इस साल जनवरी महीने में ही अकेले 15 मामले पैंगोलिंस शिकार तस्करी के दर्ज किए गए हैं। चीन व अन्य एशियाई देशों का तो पता नहीं लेकिन भारत में यह वर्ष पैंगोलिन पर बहुत भारी पड़ने वाला है। एक और चौंकाने वाली जानकारी मिली है जो आरटीआई से नहीं वाइल्डलाइफ क्राईम कंट्रोल ब्यूरो की वेबसाइट से मिली है। उसके मुताबिक भारत में सर्वाधिक शिकारी जो वांछित व दोष सिद्ध है। जिन पर मामले चल रहे हैं मुस्लिम संप्रदाय से आते हैं सभी के नाम वेबसाइट पर फोटो सहित अंकित है। भांड बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान भी ब्यूरो की वेबसाइट पर चस्पा है नाम फोटो एड्रेस सहित।
दूसरे नंबर पर मूलनिवासी मूलनिवासी चिल्लाने वाले जनजातीय लोग है । कुछ हरामखोर स्वार्थी शिकारियों के कारण पूरा जीव जगत खामियाजा उठाता है क्योंकि दुनिया भर के जीव विज्ञानियों महामारी विश्लेषकों का अनुमान है कि कोरोनावायरस चमगादड़ से होते हुए पैंगोलिन के माध्यम से इंसान के शरीर में आया यह भी एक स्टडी है कोरोना वायरस के प्रसार इंसानों में इसके प्राथमिक संक्रमण को लेकर इस पर रिसर्च हो रही है साथ ही इस पर भी अनुसंधान जारी है क्या यह मानव निर्मित? चीन के खुराफाती दिमाग की उपज है।
सच्चाई कुछ भी हो केवल अंतरराष्ट्रीय संधियों जो वन्यजीवों को संरक्षण को लेकर है या वन्यजीवों के नाम पर दिवस मनाने से कुछ नहीं होने वाला पूरी मानवता को एकजुट होना होगा इन ईश्वर के बनाए हुए परोपकारी कर्मठ जीवो को बचाने के लिए धरातल पर कार्य होना चाहिए। हमारे पूर्वज आर्य ऋषि मुनियों ने बहुत सुंदर दर्शन इन जीवो के बचाने के लिए दिया था उन्होंने कहा था “सर्व।नी भूतानि मित्रस्य चक्षुस्य समीक्षामहे” अर्थात सभी जीवो को प्राणियों को मित्र की दृष्टि से देखें।
जब हमारी दृष्टि हमारा नजरिया इन को लेकर नकारात्मकता में बदल जाता है तभी यह जीव खतरे में आ जाते हैं। साथ ही साथ अपने आसपास घटित होने वाले किसी वन्यजीव अपराध की सूचना तुरंत वन विभाग को दे वन विभाग को दे या ना दे लेकिन वाइल्डलाइफ क्राईम कंट्रोल ब्यूरो नई दिल्ली को जरूर दें बहुत जबरदस्त टीम है तुरंत रिस्पांस करती है। इंटरनेट पर सर्च करे इसका पूरा एड्रेस मौजूद है।

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