Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING NEWS
● गौतमबुद्ध नगर पुलिस में बड़ा फेरबदल, अभय कुमार मिश्र बने ADCP ग्रेटर नोएडा ● जेवर एयरपोर्ट पर यात्रियों का हंगामा, लखनऊ जाने वाली फ्लाइट करीब तीन घंटे लेट ● दिल्ली-NCR में बदलेगा मौसम, 9 अक्तूबर को बारिश और तेज हवाओं का अनुमान ● लखनऊ में गोमती की बाढ़ विकराल, प्लासियो मॉल और इकाना स्टेडियम के सामने भरा पानी ● ग्रेटर नोएडा बस अग्निकांड: किसी का सामान जला तो किसी की जिंदगी भर की जमा-पूंजी ● ग्रेटर नोएडा में पेयजल समस्या पर RWA ने उठाई आवाज, CEO ने दिए स्थायी समाधान के निर्देश ● हमीरपुर के राठ में सपाइयों का प्रदर्शन, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग ● 5 करोड़ रुपये लेकर प्रेमानंद महाराज से मिलने का आरोप, विराट कोहली की टीम ने बताया सच ● ग्रेटर नोएडा में जाली नोट छापने वाले गिरोह का पर्दाफाश, 3 गिरफ्तार ● गौतमबुद्ध नगर में शिक्षक सम्मान समारोह, प्राथमिक से माध्यमिक स्तर तक विजेताओं के नाम घोषित

यूपी चुनाव 2027 में महिला वोट बैंक क्यों अहम? सपा-भाजपा के दांव से समझिए पूरा सियासी गणित

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले महिला मतदाताओं को साधने की सियासी कोशिश तेज हो गई है। राज्य की राजनीति में महिला वोट बैंक अब महज एक चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि सत्ता की राह तय करने वाला महत्वपूर्ण फैक्टर बनता जा रहा है।
top-news

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले महिला मतदाताओं को साधने की सियासी कोशिश तेज हो गई है। राज्य की राजनीति में महिला वोट बैंक अब महज एक चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि सत्ता की राह तय करने वाला महत्वपूर्ण फैक्टर बनता जा रहा है। हाल के चुनावों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और कई राज्यों में उनके वोटिंग पैटर्न से राजनीतिक दलों को यह संकेत मिला है कि आधी आबादी को नजरअंदाज करना चुनावी तौर पर भारी पड़ सकता है। इसी रणनीति के तहत योगी आदित्यनाथ सरकार ने 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए आजीवन मुफ्त बस यात्रा की योजना शुरू की है। ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा’ योजना के अलावा रक्षाबंधन पर 27, 28 और 29 अगस्त को महिलाओं को एक सहयात्री के साथ निशुल्क बस यात्रा की सुविधा देने का भी ऐलान किया गया है।


वहीं, समाजवादी पार्टी ने भी महिला वोटरों को साधने के लिए बड़ा चुनावी दांव चला है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और सांसद डिंपल यादव ने ‘स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना’ का ऐलान करते हुए सरकार बनने पर गरीब महिलाओं को हर साल 40 हजार रुपये देने का दावा किया। इसके साथ छात्राओं को इंटर पास करने के बाद लैपटॉप और साइकिल, सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा और छात्राओं के लिए मुफ्त मेट्रो सफर जैसी घोषणाएं की गईं। सपा ने सरकारी स्कूलों की फीस माफी, निजी स्कूलों की फीस आधी करने, न्यूट्रिशन मिशन दोबारा शुरू करने और आंगनबाड़ी केंद्रों को मजबूत करने का भी वादा किया है। अखिलेश यादव ने महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर भाजपा सरकार पर सवाल उठाए। इसके जवाब में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सपा की घोषणाओं को चुनावी वादों का ‘पिटारा’ बताते हुए निशाना साधा।


दरअसल, यूपी में महिला वोट बैंक इसलिए अहम है क्योंकि 2022 के विधानसभा चुनाव समेत हाल के कई चुनावों में महिलाओं की चुनावी भागीदारी ने सियासी समीकरणों को प्रभावित किया है। बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी महिला मतदाताओं की भूमिका ने राजनीतिक दलों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर किया है। अब 2027 के यूपी चुनाव में भाजपा और सपा के बीच महिला केंद्रित योजनाओं और वादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ती दिखाई दे रही है। दूसरी ओर, बसपा भी दलित, पिछड़ा, अल्पसंख्यक और सवर्ण समाज को साथ लाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या महिलाओं के लिए मुफ्त सुविधाएं, आर्थिक मदद, शिक्षा और सुरक्षा के वादे चुनावी नतीजों को प्रभावित करेंगे? यूपी की करीब आधी आबादी को अपने पक्ष में करने की यह जंग 2027 के चुनावी मुकाबले को और दिलचस्प बना सकती है।