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“समृद्ध किसान, जिय ! हो सिवान के लाल”

ग्रेटर नॉएडा (आर्य सागर खारी) : दृढ़ निश्चय, सही दिशा में किए गए परिश्रम कार्य के प्रति पूर्ण समर्पण भाव अनुशासन सतत प्रयासों से क्या कुछ हासिल नहीं किया जा सकता? व्यक्ति व्यक्तिगत उन्नति के साथ साथ सामूहिक समृद्धि का भी संवाहक बन जाता है। इन्हीं मानवीय गुणों से कोई भी व्यक्ति अन्य व्यक्तियों के जीवन में आशा सफलता का संचार कर देता है।

आज मैं आप सभी के साथ एक ऊर्जा व प्रेरणादायक किस्सा साझा कर रहा हूं भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद की जन्म भूमि बिहार के सिवान जिले / शहर के निवासी राजनेश चंद्र सिंह जी की। राजनेश चंद्र जी का जन्म सिवान के पहलजपुर गांव में संभ्रांत किसान परिवार में हुआ. खेती किसानी की चुनौतियां क्या होती है यह उन्होंने भली-भांति जाना है हालांकि उनके पिताजी सरकारी सेवक थे. वह नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे खेती किसानी करें. उनके पिताजी चाहते थे वह तकनीकी प्रबंधन शिक्षा अर्जित कर पब्लिक व प्राइवेट सेक्टर में अच्छी जॉब हासिल करें ऐसा ही हुआ धीरे-धीरे वक्त ने करवट बदली राजनेश चंद्र जी पढ़ाई में काफी मेधावी रहे। उन्होंने देश के नामी मैरिटाइम इंस्टीट्यूट से नॉटिकल साइंस में ग्रैजुएट डिप्लोमा टेक्निकल कोर्स पूरा किया। वर्ष 2002 में उन्होंने मर्चेंट नेवी में अच्छी जॉब हासिल की मर्चेंट नेवी में रहते हुए उन्होंने अमेरिका इंग्लैंड रसिया चाइना आदि देशों की यात्रा की। 400000 रुपया मासिक लगभग इनका वेतन पैकेज था साथ ही तमाम सुख सुविधाएं जो इन्हें मर्चेंट फर्म की तरफ से मिलती थी। लेकिन कुछ लोग अलग ही धातु के बने होते हैं वह अपनी ही उन्नति में संतुष्ट नहीं होते अपितु सबकी उन्नति में अपनी उन्नति समझते हैं सब की समृद्धि में अपनी समृद्धि समझते हैं ऐसे ही उच्च भाव से युक्त हैं राजनेश चंद्र जी।

वर्ष 2016- 17 में भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप इंडिया का आवाहन किया। साथ ही भारत सरकार किसानों की आय किस प्रकार दोगुनी हो इस को लेकर प्रतिबद्ध थी। बस इसी सब से प्रेरणा लेकर राजनेश चंद्र जी ने निश्चय कर लिया कि वह एक ऐसे अनोखे स्टार्टअप की शुरुआत करेंगे जिससे देश के अन्नदाता किसान को समृद्धि व उसकी उपज का तिगुना चौगुना मूल्य लाभ मिले वह बिचौलियों या मिडिलमैन की कमीशन खोरी आर्थिक शोषण से मुक्त हो। किसान कल्याण के लिए उन्होंने मर्चेंट नेवी की आकर्षक प्रभावशाली नौकरी को रिजाइन कर अपने स्टार्टअप को सफल बनाने के मार्ग पर चल पड़े।

साथ ही उन्होंने अनुभव किया किसानों को यह सब लाभ तभी मिल सकता है जब रहे परंपरागत रासायनिक उर्वरकों बेहताशा कीटनाशकों के इस्तेमाल पर आधारित कृषि को छोड़कर कुदरती जैविक खेती करें. विष मुक्त कुदरती व्यवसायिक खेती केवल और केवल एक समाधान है. इस क्षेत्र में देश-दुनिया में मर्चेंट नेवी के दौरान उनका भ्रमण काम आया उन्होंने गूगल, यूट्यूब इंटरनेट से ऑर्गेनिक फार्मिंग से संबंधित ट्यूटोरियल स्टडी मैटेरियल को हासिल किया. जैविक खेती से संबंधित सैद्धांतिक व प्रायोगिक ज्ञान में महारत हासिल की। वर्ष 2018 में छोटे भाई रमनेश चंद्र सिंह के साथ – मार्तंडा भूतृबद्धा एग्रो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी रजिस्टर्ड कराई। अब कंपनी तो रजिस्टर्ड हो गई लेकिन सबसे बड़ी समस्या थी कैसे किसानों को जैविक खेती के प्रति जागरूक किया जाए उन्हें हानिकारक परंपरागत कृषि से हटाकर व्यवसायिक खेती की ओर शिफ्ट किया जाए। इस कार्य के लिए उन्होंने दिल्ली एनसीआर के किसानों को चुना अर्थात राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को अपनी कर्मस्थली बनाया. इसका कारण यह था उन्होंने अनुभव किया क्योंकि दिल्ली एनसीआर का किसान आधुनिक खेती किसानी में काफी पिछड़ा हुआ है साथ ही अनावश्यक भूमि अधिग्रहण घटता भूजल स्तर ने किसानों के लिए कृषि क्षेत्र में अनेकों समस्याएं खड़ी की है।

अपने अखंड सतत प्रयासों से राजनेश चंद्र जी ने गौतम बुध नगर एबं आस पास के सैकड़ो किसानों को जैविक खेती में प्रशिक्षित जागरूक किया। वर्ष 2018 में ही जैविक खेती करने वाले किसानों की कृषि उत्पाद फल सब्जी दलहन तिलहन को सीधे कंजूमर को उपलब्ध कराने के लिए e-commerce पोर्टल- healthyhaat.com की स्थापना की। यह अपने आप में अनोखा अद्वितीय पोर्टल है जिसमें कोई भी किसान रजिस्टर्ड कर सीधे अपनी ऑर्गेनिक वेजिटेबल या फ्रूट को सेल कर सकता है।

कृषि विज्ञान केंद्र छोलस गौतम बुध नगर के तकनीकी सहयोग कृषि वैज्ञानिकों के परामर्श के आधार पर उन्होंने गांव तिलपता करनवास के प्रगतिशील किसान राजेंद्र सिंह भाटी व प्रधान सुदेश भाटी के राजारामपुर गांव सिकंदराबाद औद्योगिक एरिया में स्थित 50 एकड़ के कृषि भूखंड पर सफल अभिनव प्रयोग की शुरुआत की।

आज 50 एकड़ से अधिक जमीन पर ऑर्गेनिक फार्मिंग हो रही है Chinese cabbage, red cabbage, पाक चाॅई, खेल, लेटूस, र॔ग बिरंगी फूल गोभी, बेबी कॉर्न ब्रोकली गाजर टमाटर सहित सैकड़ों सब्जियों का उत्पादन हो रहा है. साथ ही सीजनल फ्रूट की भी सघन बागवानी हो रही है. ऑर्गेनिक फल सब्जियों को सीधे हेल्दी हार्ट पोर्टल के माध्यम से जैविक उत्पादों के इच्छुक ग्राहकों को भेज दिया जाता है. जिसके कारण “स्वस्थ नागरिक, समृद्ध किसान” का मूल वाक्य सफल सार्थक हो रहा है।

जैविक खेती करने वाले किसानों को बेहद फायदा इससे हो रहा है। देखा देखी बहुत से किसान ऑर्गेनिक फार्मिंग करने लगे हैं अपनी सब्जी का वैल्यू एडिशन कर उसे हेल्दी हाट पोर्टल के माध्यम से भेज रहे हैं। राजनेश चंद्र जी की कंपनी इस पुनीत कार्य में नाम मात्र का मुनाफा लेती है। साथ ही साथ 50 से ज्यादा लोगों को इस कार्य में उनकी कंपनी के माध्यम से रोजगार मिल रहा है अर्थात एंप्लॉयमेंट जेनरेशन हुआ है। फारमर (फाउंडेशन फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च मैनेजमेंट एंड एनवायरनमेंट रिमेडियेशन) संस्था के द्वारा तकनीकी सहयोग एवं पी.जी.एस. गवर्नमेंट ऑफ इंडिया से सर्टिफाइड कराई जाती है।

उनकी कंपनी अब किसानों को उत्पादों को सीधे सात समुंदर पार निर्यात करने पर भी विचार कर रही है कुछ गल्फ कंट्री से नेगोशिएशन चल रही है. हम कह सकते हैं मर्चेंट नेवी के इस ऑफिसर ने अन्नदाता भारत के किसान को समृद्धि की नौका पर सवार कर दिया है. देखते हैं यह नौका अभी कितने कीर्तिमान बनाती है।

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