Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING NEWS
● जन्माष्टमी पर कृष्णमय हुआ देश: मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, मुंबई में दही हांडी की जोरदार तैयारी ● Public Exam Reforms: देश की परीक्षा व्यवस्था में होंगे बड़े सुधार? हाई-पावर्ड टास्क फोर्स ने मांगे सुझाव, 13 सितंबर तक मौका ● Ghaziabad: अजनारा इंटीग्रिटी सोसाइटी में सुविधाएं अधूरी, मेंटेनेंस बढ़ाने और मनमाने बिजली शुल्क का आरोप ● नोएडा मजदूर आंदोलन: आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द, हाईकोर्ट के फैसले से पुलिस के आरोपों पर उठे सवाल ● जन्माष्टमी पर दिल्ली-NCR में झमाझम बारिश, नोएडा-गाजियाबाद में जलभराव; गर्मी से मिली राहत ● Greater Noida Traffic Alert: किसान चौक पर आज रात से ट्रैफिक डायवर्जन, दो सप्ताह तक संभलकर चलें ● एम.सी. गोपीचंद इंटर कॉलेज में हर्षोल्लास से मनाई गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, राधा-कृष्ण की झांकी ने मोहा मन ● Sharda University में ‘दीक्षारंभ 2026’ का भव्य आयोजन, Chirag Paswan ने छात्रों को दिया सफलता का मंत्र ● EV India Expo 2026 का सफल समापन, 30 हजार से ज्यादा बिजनेस विजिटर्स ने लिया हिस्सा ● ग्रेटर नोएडा में श्रमिक आवास से एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी तक 7 बड़े फैसले, जानें क्या बदलेगा

UP Politics: सीट बंटवारे पर सपा-कांग्रेस में बढ़ी तल्खी, विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की राह हुई मुश्किल

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर सियासी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। दोनों दलों के नेताओं के सार्वजनिक बयान इस बात के संकेत दे रहे हैं कि गठबंधन को लेकर बातचीत आसान नहीं रहने वाली।
top-news

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर सियासी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। दोनों दलों के नेताओं के सार्वजनिक बयान इस बात के संकेत दे रहे हैं कि गठबंधन को लेकर बातचीत आसान नहीं रहने वाली। कांग्रेस इस बार गठबंधन में सम्मानजनक और बराबरी की हिस्सेदारी की मांग पर अड़ी हुई है और 150 से अधिक सीटों पर दावा जता रही है। दूसरी ओर, सपा का स्पष्ट रुख है कि सीटों का बंटवारा केवल जीतने की क्षमता के आधार पर होना चाहिए, न कि किसी दल की राजनीतिक इच्छा के अनुसार। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों पार्टियां सार्वजनिक बयानों के जरिए अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत दिखाकर बातचीत में बेहतर स्थिति हासिल करने की कोशिश कर रही हैं। कांग्रेस यह संदेश भी देने का प्रयास कर रही है कि उसके साथ गठबंधन होने पर ही विपक्षी वोटों का पूरा लाभ मिल सकता है। इसी रणनीति के तहत समय-समय पर बसपा के साथ संभावित समीकरणों के संकेत भी दिए गए, हालांकि बसपा ने ऐसे दावों को कभी गंभीरता से स्वीकार नहीं किया।


विवाद उस समय और तेज हो गया जब कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने दावा किया कि 2022 विधानसभा चुनाव में सपा 120 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर सकी थी, जबकि 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन के बाद उसकी सीटों की संख्या बढ़कर 37 हो गई। इस बयान पर सपा के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गठबंधन को मजबूत रखना है तो नेताओं को सार्वजनिक मंचों पर संयम और मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। इमरान मसूद पहले भी सपा पर मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों को पर्याप्त मजबूती से न उठाने का आरोप लगाते रहे हैं। वहीं कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने साफ कर दिया है कि पार्टी इस बार "छोटे भाई" की भूमिका स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है और सम्मानजनक साझेदारी के साथ ही चुनावी मैदान में उतरेगी। कांग्रेस का यह रुख साफ संकेत देता है कि वह इस बार सीट बंटवारे में पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत स्थिति चाहती है।


दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी अपने पुराने चुनावी आंकड़ों का हवाला देकर कांग्रेस के दावों को कमजोर बताने की कोशिश कर रही है। सपा नेताओं का कहना है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को गठबंधन के तहत 107 सीटें मिली थीं, लेकिन वह केवल सात सीटें ही जीत सकी। वहीं जब कांग्रेस ने अलग चुनाव लड़ा था, तब उसे सिर्फ दो सीटों पर सफलता मिली थी। ऐसे में सपा का तर्क है कि भाजपा जैसी मजबूत पार्टी को हराने के लिए सीटों की संख्या नहीं, बल्कि जीतने की क्षमता सबसे बड़ा पैमाना होना चाहिए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में दोनों दलों के बीच कई दौर की बातचीत होगी और सीट बंटवारे का अंतिम फार्मूला चुनावी रणनीति, क्षेत्रीय समीकरण और जीत की संभावनाओं को ध्यान में रखकर तय किया जाएगा। हालांकि मौजूदा बयानबाजी ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में विपक्षी गठबंधन की राह आसान नहीं है और सीटों को लेकर सपा-कांग्रेस के बीच सियासी रस्साकशी अभी और तेज हो सकती है।