शायद यह पहली बार है कि पारंपरिक राखी बनाने के अलावा, महिलाओं ने नए-नए प्रयोग करते हुए कई अन्य प्रकार की राखियां भी विकसित की हैं जिनमें विशेष रूप से तैयार मोदी राखी, बीज राखी भी शामिल है जिसके बीज राखी के बाद पौधे लगाने के काम में आ सकते हैं. इसी प्रकार से पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी से बनी राखियां, दाल से बनी राखियां, चावल, गेहूं और अनाज के अन्य सामानों से बनी राखियाँ, मधुबनी पेंटिंग से बनी राखियां, हस्तकला की वस्तुओं से बनी राखियां, आदिवासी वस्तुओं से बनी राखियां आदि भी बड़ी मात्रा में देश के विभिन्न राज्यों में बनाई जा रही हैं.
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