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Greater Noida: यूपी में लागू हुई नई MSME इंडस्ट्रियल एस्टेट मैनेजमेंट पॉलिसी-2025! अब ई-नीलामी से मिलेगा औद्योगिक भूखंड

Greater Noida: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में औद्योगिक भूखंडों के प्रबंधन में पारदर्शिता और कार्यकुशलता लाने के लिए नई MSME Industrial Estate Management Policy-2025 लागू कर दी है। अपर मुख्य सचिव (MSME) आलोक कुमार द्वारा जारी इस नीति के साथ ही पहले से लागू 19 पुराने शासनादेश निरस्त कर दिए गए हैं। अब राज्य में औद्योगिक भूखंड केवल ई-नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से पट्टे या किराये पर उपलब्ध कराए जाएंगे।
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Greater Noida: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में औद्योगिक भूखंडों के प्रबंधन में पारदर्शिता और कार्यकुशलता लाने के लिए नई MSME Industrial Estate Management Policy-2025 लागू कर दी है। अपर मुख्य सचिव (MSME) आलोक कुमार द्वारा जारी इस नीति के साथ ही पहले से लागू 19 पुराने शासनादेश निरस्त कर दिए गए हैं। अब राज्य में औद्योगिक भूखंड केवल ई-नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से पट्टे या किराये पर उपलब्ध कराए जाएंगे। नीलामी में भाग लेने के लिए आवेदक को भूखंड की कुल लागत का 10% राशि अर्नेस्ट मनी के रूप में जमा करनी होगी। साथ ही, भूखंड का पूरा भुगतान तीन साल के भीतर करना अनिवार्य होगा, अन्यथा आवंटन रद्द कर दिया जाएगा।


Greater Noida: जाने क्या है नई नीति, जरूरत पड़ने पर सरकार कर सकती है ये काम 

नई नीति के तहत वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आरक्षित मूल्य पश्चिमी क्षेत्र में ₹3,000 प्रति वर्ग मीटर, मध्य क्षेत्र में ₹2,500 प्रति वर्ग मीटर, और पूर्वी व बुंदेलखंड क्षेत्र में ₹2,000 प्रति वर्ग मीटर तय किया गया है। यह दरें हर वर्ष 5% की दर से बढ़ेंगी। भूखंड का भुगतान एकमुश्त करने पर खरीदार को 2% की छूट भी मिलेगी। इसके अलावा, अनुसूचित जाति एवं जनजाति उद्यमियों के लिए 10% भूखंड आरक्षित रहेंगे। सरकार को आवश्यकता पड़ने पर प्रमुख इकाइयों (Anchor Units) को नामित करने का अधिकार भी प्राप्त होगा, जिससे बड़े निवेशकों को आकर्षित किया जा सके।


औद्योगिक क्षेत्र का होगा विकास, बढ़ेगा निवेश 

इस नीति का उद्देश्य Greater Noida में दशकों पुराने औद्योगिक क्षेत्रों को सुव्यवस्थित ढंग से विकसित करना, MSME सेक्टर में निवेश बढ़ाना और औद्योगिक भूखंडों को राज्य के लिए राजस्व-उत्पादक संपत्ति में बदलना है। सरकार का मानना है कि ई-नीलामी प्रणाली न केवल पारदर्शिता सुनिश्चित करेगी, बल्कि उद्यमियों के लिए अवसर भी बढ़ाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम यूपी को उद्योग के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों में इजाफा करेगा।