ग्रेटर नोएडा अंधेरे में! सूर्या कंपनी पर क्यों मेहरबान है प्राधिकरण?
- Kapil Choudhary
- 17 Aug, 2025
नोएडा व्यूज़, ग्रेटर नोएडा।
ग्रेटर नोएडा की सड़कों से लेकर गाँवों तक अंधेरा ही अंधेरा पसरा है। जगह-जगह स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं, ग्रामीण इलाकों में तो हाल और भी बदतर है हर गाँव में सैकड़ों लाइटें महीनों से बंद हैं। शिकायतें बार-बार करने के बावजूद प्राधिकरण कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रहा। बड़ा सवाल यह है कि आखिर सूर्या कंपनी के सामने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण नतमस्तक क्यों है?
करोड़ों का बजट, फिर भी अंधेरा
हर साल स्ट्रीट लाइटों पर करोड़ों रुपये का खर्च होता है, लेकिन शहरवासी आज भी अंधेरे में सफर करने को मजबूर हैं। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से लेकर सड़क हादसों तक, खराब लाइटें हर किसी की परेशानी बढ़ा रही हैं।
एक ही कंपनी को क्यों सौंप दी पूरी ज़िम्मेदारी?
लोगों का कहना है कि पूरे शहर की लाइटों की मरम्मत की ज़िम्मेदारी एक ही कंपनी सूर्या कंपनी को सौंप दी गई है। यही वजह है कि शिकायतों के बाद भी समय पर काम नहीं हो पाता। छोटे-छोटे ठेकेदारों पर प्राधिकरण तुरंत पेनल्टी लगाता है, उनकी पेमेंट रोक देता है, लेकिन सूर्या कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती।
कौन है जिम्मेदार?
शहरवासी पूछ रहे हैं आखिर किसकी है ज़िम्मेदारी जो इस कंपनी से काम नहीं करा पा रहे? क्या अधिकारी कंपनी के दबाव में हैं? क्या करोड़ों का बजट खर्च होने के बावजूद जनता को अंधेरे में छोड़ देना प्राधिकरण की “मजबूरी” है या “मिलीभगत”?
जनता का सवाल, कब सुधरेगी व्यवस्था?
रात होते ही ग्रेटर नोएडा की सड़कों और गलियों में अंधेरा फैल जाता है। लोग पूछ रहे हैं कि जब छोटे ठेकेदारों पर सख्ती की जाती है तो सूर्या कंपनी पर कार्रवाई क्यों नहीं? शहरवासियों की मांग है कि या तो कंपनी से तुरंत काम कराया जाए या फिर उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।