Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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Noida: यमुना डूब क्षेत्र फार्महाउस मामला में हाईकोर्ट ने तोड़फोड़ पर लगाई रोक, अगली सुनवाई 24 सितंबर को

Noida: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यमुना डूब क्षेत्र (Yamuna Flood Zone) में बने फार्महाउसों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) को फिलहाल किसी भी तरह की demolition action करने से रोक दिया है। साथ ही, फार्महाउस मालिकों को भी यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया गया है। यह निर्देश 30 फार्महाउस मालिकों की ओर से दायर की गई याचिका पर जारी हुआ है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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Noida: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यमुना डूब क्षेत्र (Yamuna Flood Zone) में बने फार्महाउसों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) को फिलहाल किसी भी तरह की demolition action करने से रोक दिया है। साथ ही, फार्महाउस मालिकों को भी यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया गया है। यह निर्देश 30 फार्महाउस मालिकों की ओर से दायर की गई याचिका पर जारी हुआ है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।


याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उनके फार्महाउस यमुना नदी से करीब 4-5 किलोमीटर दूर और हाई फ्लड लेवल (HFL) से बाहर हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि प्राधिकरण की कार्रवाई में न तो पारदर्शिता (transparency) है और न ही निष्पक्षता। उनके अनुसार illegal construction drive को लेकर चयनात्मक रवैया अपनाया जा रहा है। इस बीच, हाईकोर्ट के आदेश ने फिलहाल फार्महाउस मालिकों को बड़ी राहत दी है।


गौरतलब है कि यह विवाद 2022 से जारी है। जून 2022 में नोएडा प्राधिकरण ने यमुना डूब क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कार्रवाई की थी और महज एक दिन में 62 फार्महाउस गिरा दिए थे। इसके बाद 8, 11 और 16 जून को भी अभियान जारी रहा, जिसमें कई अवैध निर्माण (illegal structures) ध्वस्त किए गए। हाल ही में 26 अगस्त को 30 से अधिक फार्महाउसों को गिराया गया था। इसके बाद से ही मामला न्यायालय में लंबित है और प्राधिकरण ने किसी भी टिप्पणी से इनकार किया है।


फिलहाल, हाईकोर्ट के निर्देश से तोड़फोड़ अभियान पर विराम लग गया है। अब नोएडा प्राधिकरण कोर्ट के आदेश का अध्ययन कर रहा है और आगे की कार्रवाई पूरी तरह से न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगी। 24 सितंबर की सुनवाई इस पूरे प्रकरण का अहम मोड़ साबित हो सकती है।