Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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Yamuna Authority: यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में 550 करोड़ की भूमि अवैध कब्जे से मुक्त, जेवर बांगर व मेवला गोपालगढ़ में चला ध्वस्तीकरण अभियान

Yamuna Authority: यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने अपने अधिसूचित क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण (Illegal Encroachment) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) राकेश कुमार सिंह के कड़े निर्देशों के बाद विशेष कार्याधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह के नेतृत्व में शुक्रवार 12 सितंबर 2025 को जेवर बांगर और मेवला गोपालगढ़ गांवों में ध्वस्तीकरण (Demolition Drive) अभियान चलाया गया। इस दौरान करीब 1,10,000 वर्गमीटर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। इस भूमि की बाजार कीमत लगभग 550 करोड़ रुपए आंकी गई है।
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Yamuna Authority: यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) ने अपने अधिसूचित क्षेत्र में अवैध अतिक्रमण (Illegal Encroachment) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) राकेश कुमार सिंह के कड़े निर्देशों के बाद विशेष कार्याधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह के नेतृत्व में शुक्रवार 12 सितंबर 2025 को जेवर बांगर और मेवला गोपालगढ़ गांवों में ध्वस्तीकरण (Demolition Drive) अभियान चलाया गया। इस दौरान करीब 1,10,000 वर्गमीटर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। इस भूमि की बाजार कीमत लगभग 550 करोड़ रुपए आंकी गई है।


अभियान के दौरान यमुना अथॉरिटी ने साफ किया कि अवैध निर्माण और कब्जे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। अधिकारीगण ने चेतावनी दी कि जो लोग भोले-भाले खरीदारों को अवैध जमीन का सौदा करवाते हैं, उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। Yamuna Authority ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की संपत्ति खरीदने से पहले उसकी कानूनी स्थिति और भूमि रिकॉर्ड अवश्य जांच लें।


ध्वस्तीकरण अभियान में भूलेख विभाग से विशेष कार्याधिकारी शिवौतार सिंह, डिप्टी कलेक्टर अभिषेक साही समेत परियोजना और भूलेख विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे। प्रशासन ने इस कार्रवाई को अवैध कब्जेदारों के खिलाफ एक कड़ा संदेश बताया है। इससे पहले भी YEIDA ने अपने अधिसूचित क्षेत्रों में कई बार इसी तरह के अभियान चलाकर जमीनों को मुक्त कराया है।


Yamuna Authority ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे अतिक्रमण विरोधी अभियान (Anti-Encroachment Drive) आगे भी लगातार जारी रहेंगे। इस कदम को लेकर स्थानीय लोगों ने इसे सराहनीय बताया है क्योंकि इससे भविष्य में होने वाले भूमि विवादों पर भी अंकुश लगेगा।