Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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Azam Khan: आजम खां की मुश्किलें बरकरार! कई केसों में फैसला जल्द, ईडी और IT की जांच भी जारी

Azam Khan: समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां जेल से रिहा होने के बाद भी कानूनी संकट से घिरे हुए हैं। भले ही उन्हें सीतापुर जेल से जमानत पर रिहाई मिल चुकी हो, लेकिन उनकी परेशानियां खत्म होती नहीं दिख रही हैं। जानकारी के अनुसार, तीन अहम मामले अब फैसले के करीब पहुंच चुके हैं और एक अक्तूबर को उन्हें एमपी-एमएलए कोर्ट रामपुर में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना पड़ेगा।
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Azam Khan: समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां जेल से रिहा होने के बाद भी कानूनी संकट से घिरे हुए हैं। भले ही उन्हें सीतापुर जेल से जमानत पर रिहाई मिल चुकी हो, लेकिन उनकी परेशानियां खत्म होती नहीं दिख रही हैं। जानकारी के अनुसार, तीन अहम मामले अब फैसले के करीब पहुंच चुके हैं और एक अक्तूबर को उन्हें एमपी-एमएलए कोर्ट रामपुर में व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना पड़ेगा।


Azam Khan के खिलाफ अब तक 104 केस दर्ज हुए थे, जिनमें से कई का निपटारा हो चुका है। 12 मामलों में फैसला आया है, जिसमें पांच में सजा और सात में बरी हो चुके हैं। फिलहाल 59 केस सेशन कोर्ट और 19 केस मजिस्ट्रेट कोर्ट में लंबित हैं। सबसे अहम मामला भड़काऊ भाषण (Inflammatory Speech Case) का है, जो वर्ष 2019 लोकसभा चुनाव से जुड़ा है। वहीं, पूर्व सांसद अमर सिंह के परिवार पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने और सेना पर विवादित बयान देने वाले मामले भी फैसले के करीब हैं।


कानूनी मामलों के अलावा, Azam Khan को आयकर विभाग (Income Tax Department) और प्रवर्तन निदेशालय (ED Investigation) की जांच का भी सामना करना पड़ रहा है। उनके ड्रीम प्रोजेक्ट मौलाना अली जौहर विश्वविद्यालय (Maulana Ali Jauhar University) पर गाज गिर सकती है। आयकर विभाग की जांच में करीब 350 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई थी, जिसके बाद ट्रस्ट पर ब्याज और जुर्माना मिलाकर 550 करोड़ रुपये की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू की गई। ईडी ने भी आजम खां, उनकी पत्नी तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम की संपत्तियों की जांच की है।


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि रिहाई के बाद भी Azam Khan की राजनीतिक राह आसान नहीं है। उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे और चल रही जांचें उनकी छवि और भविष्य दोनों को प्रभावित कर सकती हैं। अब सबकी निगाहें अदालत के फैसलों और ED-IT action पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में उनके राजनीतिक करियर को नई दिशा दे सकते हैं।