ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के 35 साल: औद्योगिक निवेश, शिक्षा हब और शहरी विकास की कहानी
- sakshi choudhary
- 28 Jan, 2026
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की स्थापना 28 जनवरी 1991 को हुई थी और वर्ष 2026 में प्राधिकरण ने अपने 35 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इन तीन दशकों से अधिक के सफर में ग्रेटर नोएडा ने एक आधुनिक शहर के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है। शिक्षा, उद्योग, रोजगार और आवासीय विकास के क्षेत्र में शहर ने उल्लेखनीय प्रगति की है। चौड़ी सड़कें, सर्विस रोड, हरियाली, पार्क, मॉल और आधुनिक सुविधाओं ने इसे लोगों के लिए एक पसंदीदा रिहायशी गंतव्य बनाया है, जहां गगनचुंबी सोसायटियां शहर की पहचान बन चुकी हैं।
औद्योगिक विकास के लिहाज से ग्रेटर नोएडा आज एक प्रमुख Industrial Investment Hub के रूप में जाना जाता है। दिल्ली-मुंबई Industrial Corridor से जुड़ाव के कारण यहां रेल और लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी को मजबूती मिली है। मोबाइल manufacturing कंपनियों, textile और readymade garments उद्योगों की बड़ी इकाइयों ने यहां निवेश किया है, जिससे देश और विदेश तक उत्पादों की supply हो रही है। इसके साथ ही देश का सबसे बड़ा Data Center और लगभग 750 एकड़ में विकसित Integrated Industrial Township ने Investors को आकर्षित किया है। Education Hub के रूप में भी ग्रेटर नोएडा ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है।
हालांकि विकास के साथ चुनौतियां भी सामने आई हैं। प्राधिकरण द्वारा किसानों से अधिग्रहित जमीन का लगभग आधा हिस्सा ही योजनाबद्ध विकास में उपयोग हो सका है, जबकि शेष भूमि पर अवैध कब्जों और Illegal Colonies की समस्या बनी हुई है। इससे अरबों रुपये की कीमती जमीन प्रभावित हो रही है। जमीन अधिग्रहण के दौरान किसानों से किए गए वादों के पूरा न होने से असंतोष भी देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि Greater Noida Authority को किसानों की समस्याओं का समाधान कर और अवैध कब्जों पर सख्ती दिखाकर उस सुनियोजित शहर की परिकल्पना को साकार करना चाहिए, जिसकी नींव स्थापना के समय रखी गई थी।
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