ग्रेटर नोएडा: अथॉरिटी की कार्रवाई पर सवाल, अतिक्रमण मुक्त कराई ज़मीन पर फिर से अवैध निर्माण शुरू

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ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी (GNIDA) की अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 20 जून 2025 को अथॉरिटी ने चिटेहरा गांव के खसरा संख्या 169, 170, 171 और 172 में अवैध निर्माण को ध्वस्त कर लगभग 50,000 वर्ग मीटर जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने का दावा किया था। इस कार्रवाई में बताया गया था कि उक्त जमीन पर औद्योगिक कॉलोनी काटी जा रही थी, जहां वेयरहाउस बनाए जा रहे थे। लेकिन कुछ ही समय बाद यह दावा खोखला साबित हो रहा है, क्योंकि मुक्त कराई गई जमीन पर फिर से अतिक्रमण शुरू हो गया है और ऐसा एक जगह नहीं ज्यादातर जहाँ भी अतिक्रमण हटाया गया है वह पर ये ही स्थिति हैं अथॉरिटी अतिक्रमण तोड़ने के बाद भूल जाती हैं। 

अथॉरिटी की कार्रवाई: दावा और हकीकत
20 जून को अथॉरिटी ने चिटेहरा में बुल्डोजर चलाकर अवैध निर्माण (illegal construction) को ध्वस्त किया था। इस कार्रवाई में अथॉरिटी के सीईओ के निर्देश पर 50,000 वर्ग मीटर जमीन को मुक्त कराया गया, जिसकी अनुमानित कीमत 100 करोड़ रुपये बताई गई थी। अथॉरिटी ने दावा किया था कि इस कार्रवाई से अवैध कॉलोनाइजरों को कड़ा संदेश दिया गया है। लेकिन कुछ ही हफ्तों बाद उसी स्थान पर फिर से अतिक्रमण की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे प्राधिकरण की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। यही हाल वैदपुरा, भनौता और तिलपता आदि गाँवो में हैं। 

अवैध निर्माण: एक गंभीर चुनौती
ग्रेटर नोएडा में अवैध निर्माण और अतिक्रमण अब एक गंभीर समस्या बन चुका है। बिना अनुमति के बन रहे बहुमंजिला भवन और अवैध कॉलोनियां न केवल शहर की सुव्यवस्थित योजना को प्रभावित कर रही हैं, बल्कि आम जनता को भी ठगने का काम कर रही हैं। कॉलोनाइजर भोले-भाले लोगों को गुमराह कर उनकी मेहनत की कमाई को अवैध संपत्तियों में निवेश करवा रहे हैं। अथॉरिटी की ओर से बार-बार चेतावनी और नोटिस जारी करने के बावजूद इन गतिविधियों पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है। 

स्थानीय निवासियों का गुस्सा
स्थानीय निवासियों ने अथॉरिटी की कार्यशैली पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि अगर अथॉरिटी समय-समय पर नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई करता, तो अवैध निर्माण दोबारा शुरू नहीं होता। एक निवासी सुमित ने कहा, "अथॉरिटी की कार्रवाई बस दिखावा बनकर रह गई है। बुल्डोजर चलाने के बाद कोई फॉलो-अप नहीं होता, जिसके कारण कॉलोनाइजर बेखौफ होकर फिर से निर्माण शुरू कर देते हैं।"
ग्रेटर नोएडा में अवैध निर्माण की समस्या दिनों-दिन विकराल होती जा रही है। गांवों में बिना नक्शा पास कराए 8 से 10 मंज़िला फ्लैट और विला धड़ल्ले से खड़े किए जा रहे हैं, लेकिन अथॉरिटी की ओर से इन पर ठोस रोकथाम के बजाय सिर्फ़ औपचारिक कार्रवाइयों का सिलसिला जारी है।

ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई तब तक प्रभावी नहीं होगी, जब तक इसमें निरंतरता और कड़ाई नहीं लाई जाती। चिटेहरा में दोबारा शुरू हुए अतिक्रमण ने प्राधिकरण की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। अगर ग्रेटर नोएडा को नियोजित और सुव्यवस्थित शहर के रूप में विकसित करना है, तो प्राधिकरण को अपनी नीतियों और निगरानी तंत्र को और मजबूत करना होगा।

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