ग्रेटर नोएडा में ‘भूमि लूट’ का खेल! प्राधिकरण की मिलीभगत से खड़े हो रहे अवैध साम्राज्य

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हजारों करोड़ के भूमि घोटाले की आहट! अवैध निर्माणों ने खोली प्राधिकरण की पोल

ग्रेटर नोएडा

ग्रेटर नोएडा में लगातार बढ़ रहे अवैध निर्माण अब प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। जिन क्षेत्रों से कभी सड़कें और सार्वजनिक रास्ते प्रस्तावित थे, आज वहां बहुमंजिला अवैध निर्माण खड़े हो चुके हैं। हालत यह है कि प्राधिकरण की सैकड़ों करोड़ रुपये मूल्य की जमीन या तो कब्जों की भेंट चढ़ रही है या फिर बेकार पड़ी हुई है।

शिकायतों के बावजूद कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता?

स्थानीय ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों का आरोप है कि अधिकारियों की उदासीनता के कारण अब उन इलाकों में भी तेजी से अवैध निर्माण शुरू हो चुका है, जहां पहले खाली जमीन हुआ करती थी। शिकायतें लगातार की जा रही हैं, लेकिन प्राधिकरण के अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं निभाई जाती हैं।

‘सांकेतिक कार्रवाई’ का खेल, फिर शुरू हो जाता है निर्माण

सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में पहले से ही संबंधित लोगों को सूचना दे दी जाती है कि “सिर्फ सांकेतिक कार्रवाई” होगी। बुलडोजर और सीलिंग की कार्रवाई महज दिखावे तक सीमित रहती है, जबकि कुछ समय बाद निर्माण कार्य फिर उसी रफ्तार से शुरू हो जाता है। बड़ा सवाल यह है कि जब पूरा सिस्टम हाईटेक हो चुका है और निगरानी व सर्वे पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तब भी प्राधिकरण को अवैध निर्माणों की जानकारी क्यों नहीं होती?

एक-एक ईंट की जानकारी, फिर भी चुप क्यों अधिकारी?

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि किसी इलाके में एक ईंट भी लगती है तो कर्मचारियों और अधिकारियों को इसकी पूरी जानकारी होती है। इसके बावजूद यह तय किया जाता है कि उस निर्माण को हटाना है या उसे जारी रहने देना है। यही वजह है कि अब लोग खुले तौर पर अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाने लगे हैं।

भूमि विभाग की भूमिका पर भी उठे सवाल

सबसे बड़ा सवाल भूमि विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहा है। प्राधिकरण का भूमि विभाग वर्षों से निष्क्रिय दिखाई दे रहा है। एक ओर अवैध कब्जे बढ़ते जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीन अधिग्रहण और संरक्षण के लिए कोई ठोस प्रयास नजर नहीं आ रहा। लोगों का आरोप है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए तो यह हजारों करोड़ रुपये के भूमि घोटाले के रूप में सामने आ सकता है।

अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग

क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यकाल में जितना अवैध निर्माण हुआ, उनकी जवाबदेही तय की जाए। साथ ही यह भी जांच हो कि आखिर किसके संरक्षण में लगातार सरकारी जमीनों पर अवैध निर्माण फल-फूल रहे हैं।

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