Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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UP electricity privatization: बिजलीकर्मियों ने निजीकरण के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान, दिवाली पर बिजली संकट की आशंका?

UP electricity privatization को लेकर राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ ने जोरदार विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। लखनऊ में रविवार को आयोजित मंथन शिविर में संघ के सदस्यों ने संकल्प लिया कि किसी भी हालत में privatization proposal को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि दीपावली के मौके पर उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली मिले। इस सिलसिले में 16 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों में संघ की आमसभा आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
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UP electricity privatization को लेकर राज्य विद्युत परिषद अभियंता संघ ने जोरदार विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। लखनऊ में रविवार को आयोजित मंथन शिविर में संघ के सदस्यों ने संकल्प लिया कि किसी भी हालत में privatization proposal को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि दीपावली के मौके पर उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली मिले। इस सिलसिले में 16 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिलों में संघ की आमसभा आयोजित करने का निर्णय लिया गया।


शिविर में अभियंताओं ने अब तक चले आंदोलन और Power Corporation की कार्यप्रणाली की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेशन प्रबंधन उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी कर रहा है। स्मार्ट मीटर और निजीकरण के माध्यम से जनता के साथ अन्याय किया जा रहा है। All India Power Engineers Federation के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने पूर्वांचल और दक्षिणांचल निगमों के निजीकरण के बाद कर्मचारियों को दिए गए तीन विकल्पों पर चर्चा की और सर्वसम्मति से सभी विकल्पों को खारिज कर दिया। संघ के महासचिव जितेंद्र सिंह गुर्जर, आलोक श्रीवास्तव और जगदीश पटेल ने लखनऊ की बिजली व्यवस्था को फ्रेंचाइजी मॉडल पर चलाने की भी कड़ी निंदा की।


प्रदेश में smart prepaid meter को लेकर विरोध के सुर तेज हो गए हैं। विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के अनुसार उपभोक्ताओं को प्रीपेड और पोस्टपेड मीटर चुनने का अधिकार है। बावजूद इसके, लगभग 20.69 लाख मीटर बिना अनुमति के प्रीपेड में बदल दिए गए हैं। विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि संशोधन विधेयक 2025 में इस अधिकार में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बिजली कंपनियां गलत जानकारी देकर उपभोक्ताओं को बरगला रही हैं। संघ ने चेतावनी दी कि जबरन स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का विरोध हर स्तर पर जारी रहेगा।


अधिकारियों ने Electricity Act 2003 का हवाला देते हुए कहा कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा जरूरी है और विद्युत नियामक आयोग को मामले की जांच करनी चाहिए। साथ ही, चेक मीटर घोटाले की भी स्वतंत्र जांच की मांग उठाई गई है। इस संघर्ष का मुख्य उद्देश्य निजीकरण और स्मार्ट मीटर के जरिए उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन रोकना है। दिवाली के मौके पर बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए संघ सतत प्रयासरत है।