Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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Health: बचपन में मोटापा, उम्र और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव

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बचपन का स्वस्थ विकास सुनिश्चित करना हमारे समाज की प्राथमिकता होनी चाहिए। हाल के अध्ययनों में यह स्पष्ट हुआ है कि बच्चों में मोटापे की समस्या न केवल उनकी सेहत पर बल्कि उनकी उम्र पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, मोटापे के शिकार बच्चों में कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा अधिक होता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, वर्तमान में लगभग 880 मिलियन लोग मोटापे से प्रभावित हैं, जिनमें से 160 मिलियन की उम्र 5 से 19 वर्ष के बीच है। यह संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे मोटापा एक वैश्विक महामारी के रूप में उभर रहा है। अध्ययन बताते हैं कि मोटापे के शिकार बच्चों में वयस्कता में हृदय रोग और मधुमेह का जोखिम सामान्य वजन वाले बच्चों की तुलना में कहीं अधिक होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बचपन में मोटापा हृदय रोगों का एक प्रमुख जोखिम कारक है। अधिक वजन होने से शरीर को रक्त संचार के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जो उच्च रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ा सकता है। एक हालिया अध्ययन में यह पाया गया कि हाई बीएमआई वाले बच्चों में हृदय रोग होने की संभावना 40% अधिक होती है।

इसके अलावा, मोटापा इंसुलिन प्रतिरोध का कारण बनता है, जिससे शरीर में ग्लूकोज का स्तर बढ़ता है। इससे मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है, जो बाद में हृदय रोग, किडनी की बीमारियों और अन्य जटिलताओं का कारण बन सकता है। स्वीडिश वैज्ञानिकों के एक अध्ययन में यह भी पाया गया कि बचपन में मोटापे से पीड़ित व्यक्ति की 55 वर्ष की उम्र से पहले मृत्यु का जोखिम दोगुना हो सकता है।