Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
BREAKING NEWS
● ग्रेटर नोएडा में रामलीला मंचन के लिए भूमि पूजन संपन्न, 11 से 21 अक्टूबर तक होगा विजय महोत्सव ● अखिलेश का भाजपा सरकार पर हमला, बोले- वीडियो देखकर भी दर्ज करा देंगे मुकदमा ● यूपी में 6 महीने में एक लाख युवाओं को नौकरी, सीएम योगी ने 21 अभ्यर्थियों को सौंपे नियुक्ति पत्र ● खुद के रेस्टोरेंट से खुद ऑर्डर, स्विगी को लगाया लाखों का चूना! ● यमुना प्राधिकरण की ग्रीन बेल्ट में पौधरोपण, विधायक धीरेन्द्र सिंह ने लगाए पौधे ● नोएडा में FDRC के नवीकरण कक्ष का उद्घाटन, परिवारों के विवादों के समाधान पर जोर ● यमुना प्राधिकरण ने 320 किसानों को आवंटित किए सात प्रतिशत आबादी भूखंड ● यमुना प्राधिकरण ने 320 किसानों को आवंटित किए 7 प्रतिशत आबादी भूखंड ● NEET सिस्टम में बड़े बदलाव की तैयारी, नंदन नीलेकणि समिति जल्द सौंपेगी अंतरिम रिपोर्ट ● यूपी में 26 ग्लोबल कंपनियां स्थापित करेंगी GCC, 22 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार

Haryana Assembly Elections: कांग्रेस का खराब प्रदर्शन, हुड्डा और शैलजा के बीच मतभेद प्रमुख कारण

top-news

हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों में भाजपा ने बहुमत प्राप्त कर लिया है, जबकि कांग्रेस को 35 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है। इस बार कांग्रेस के खराब प्रदर्शन के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें से एक प्रमुख कारण पार्टी के अंदर चल रहे मतभेद हैं, खासकर पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा और पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा के बीच।

भूपेंद्र हुड्डा, जो हरियाणा में कांग्रेस के प्रमुख जाट नेता हैं, लंबे समय से पार्टी का चेहरा बने हुए हैं। हालांकि, कुमारी शैलजा भी सीएम पद की दौड़ में शामिल हैं और दलित राजनीति का प्रमुख चेहरा मानी जाती हैं। उनके बीच चल रही खटपट ने चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी की एकजुटता को प्रभावित किया। कुमारी शैलजा ने चुनाव प्रचार में संकेत दिए थे कि उनका नाम सीएम पद के दावेदारों में है, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई।

चुनाव से पहले, कुमारी शैलजा ने पार्टी आलाकमान से मुलाकात भी की थी, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वह सीएम पद के लिए गंभीर हैं। भूपेंद्र हुड्डा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “लोकतंत्र में हर किसी का अधिकार है, लेकिन सीएम चुने जाने की प्रक्रिया होती है।” इन राजनीतिक मतभेदों ने न केवल पार्टी के अंदर असंतोष को जन्म दिया, बल्कि चुनाव में भी कांग्रेस के लिए चुनौती बन गए। अब देखना होगा कि कांग्रेस इन चुनौतियों का सामना कैसे करती है और पार्टी के भीतर एकता को कैसे बहाल करती है।