यादव सिंह के प्रमोशन और बेनामी कंपनियों का खुलासा
2002 में यादव सिंह को चीफ मेंटिनेंस इंजीनियर (सीएमई) के पद पर प्रमोशन मिला, जहाँ उन्होंने नौ वर्षों तक अपनी सेवाएँ दीं। उस समय अथॉरिटी में सीएमई के तीन पद थे, जिससे यादव सिंह संतुष्ट नहीं थे। इसके चलते उन्होंने अन्य पदों को समाप्त करवा कर खुद के लिए इंजीनियरिंग इन चीफ का पद बनवा लिया।
जॉब के साथ ही यादव सिंह ने बेनामी कंपनियों का जाल भी बुनना शुरू कर दिया। ये कंपनियाँ पहले सौ रुपए से शुरू होती थीं, लेकिन कुछ ही सालों में करोड़ों का कारोबार करने लगीं। यादव सिंह की अधिकतर कंपनियाँ उनकी पत्नी कुसुमलता, बेटे सनी और बेटियों करुणा और गरिमा के नाम पर थीं।
यादव सिंह का कार्यकाल और अनियमितताएँ
नौ साल तक सीएमई के पद पर रहने के दौरान यादव सिंह ने अथॉरिटी के भीतर कई पदों में फेरबदल कर इंजीनियरिंग इन चीफ का पद प्राप्त कर लिया। इसके साथ ही उन्होंने बेनामी कंपनियों की श्रृंखला बनाई।
परिवार के नाम पर करोड़ों का कारोबार
यादव सिंह की कंपनियों का कारोबार करोड़ों में पहुँच गया, जिनका मालिकाना हक उनकी पत्नी और बच्चों के पास था। पत्नी कुसुमलता, बेटा सनी और बेटियाँ करुणा और गरिमा इन कंपनियों की मालिक थीं।
बेनामी कंपनियों का विस्तार
यादव सिंह की कंपनियाँ सौ रुपए से शुरू होकर कुछ ही समय में करोड़ों का कारोबार करने लगीं। इन कंपनियों का मालिकाना हक उनके परिवार के सदस्यों के पास था, जिससे उन्होंने बेनामी संपत्ति का बड़ा जाल बुन लिया था.