उत्तर प्रदेश विधानसभा में पारित हुआ जबरन धर्म परिवर्तन विरोधी संशोधन विधेयक, सजा की अवधि और जुर्माना बढ़ाया
- sakshi choudhary
- 30 Jul, 2024
नोएडा। दिव्यांशु ठाकुर
उत्तर प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को जबरन धर्म परिवर्तन विरोधी विधेयक पारित हुआ। इस बिल का नाम उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक रखा गया है। अब तक देश के 10 राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हो चुके हैं।
योगी सरकार ने जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने मौजूदा कानून में बदलाव के लिए एक विधेयक पेश किया, जिसे मंगलवार को विधानसभा में पारित कर दिया गया। इस संशोधन विधेयक में धर्म परिवर्तन से संबंधित अपराधों की सजा की अवधि बढ़ाई गई है, जिसमें आजीवन कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा, विदेशों से धर्म परिवर्तन के लिए होने वाली फंडिंग पर भी सख्त प्रावधान किए गए हैं।
आइए जानते हैं कि यूपी में जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ क्या विधेयक लाया गया है, इसमें क्या प्रावधान हैं, कानून में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी, और किन राज्यों में जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ कानून हैं।
यूपी में जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ क्या विधेयक लाया गया है?
उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को विधानसभा में जबरन धर्म परिवर्तन विरोधी विधेयक पेश किया। इस विधेयक का नाम उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक रखा गया है। नाबालिग, एससी-एसटी का धर्म परिवर्तन कराने पर उम्रकैद के प्रावधान वाला यह विधेयक मंगलवार को विधानसभा में पारित हो गया। अब इसे विधान परिषद भेजा जाएगा और वहां से पारित होने के बाद राज्यपाल और फिर राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।
कानून में क्या नए बदलाव किए गए हैं?
सरकार का कहना है कि गुमराह कर शादी करने और अनुसूचित जाति व जनजाति (एससी-एसटी) के जबरन धर्म परिवर्तन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इन्हीं मामलों पर राज्य सरकार अंकुश लगाने जा रही है। संशोधन विधेयक में जबरन धर्म परिवर्तन से जुड़े अपराधों की सजा की अवधि बढ़ाने का प्रावधान है। इसमें आजीवन कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही, विदेशों से धर्म परिवर्तन के लिए होने वाली फंडिंग पर भी सख्त प्रावधान किए गए हैं।
2021 में बने कानून में एक से 10 साल तक की सजा और एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान था। संशोधन के जरिये इस विधेयक को सजा और जुर्माने की दृष्टि से और मजबूत किया गया है। नए प्रावधानों के अनुसार यदि किसी नाबालिग, दिव्यांग, मानसिक रूप से दुर्बल व्यक्ति, महिला, एससी-एसटी का जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाता है, तो दोषी को आजीवन कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने से दंडित किया जाएगा। इसी तरह, सामूहिक रूप से जबरन धर्म परिवर्तन पर भी आजीवन कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा होगी।
विदेशी या गैरकानूनी संस्थाओं से फंडिंग हासिल करने पर 14 वर्ष तक की सजा और 10 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यदि कोई धर्म परिवर्तन के लिए किसी व्यक्ति के जीवन या संपत्ति को भय में डालता है, हमला करता है, शादी करने का झूठा वादा करता है, प्रलोभन देकर किसी नाबालिग, महिला या व्यक्ति की तस्करी करता है, तो उसे न्यूनतम 20 साल की सजा होगी। इसे ताउम्र तक बढ़ाया जा सकेगा। पीड़ित के इलाज और पुनर्वास के लिए भी जुर्माना देना होगा।
पुराने कानून में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी?
सरकार के मुताबिक, यह संशोधन विधेयक जबरन धर्म परिवर्तन के अपराध की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए लाया गया है। इससे विदेशी और राष्ट्रविरोधी ताकतों की संगठित साजिश रोकी जा सकेगी। सजा और जुर्माने की राशि को बढ़ाने के साथ-साथ जमानत की कड़ी शर्तों के प्रावधान भी किए गए हैं। साथ ही, नाबालिग, दिव्यांग, मानसिक रूप से अस्वस्थ लोगों को भी अपराध का शिकार होने से बचाया जा सकेगा।
विपक्ष ने प्रस्तावित कानून पर क्या कहा?
मुख्य विपक्ष दल समाजवादी पार्टी ने इस विधेयक पर सवाल उठाए हैं। पार्टी के नेता फखरुल हसन चांद ने कहा कि भाजपा केवल नकारात्मक राजनीति करना चाहती है। वह बेरोजगारी और पेपर लीक के बारे में कुछ नहीं करना चाहती। चांद ने कहा कि ये ध्यान भटकाने वाले मुद्दे हैं। इनसे लोगों का कोई भला नहीं होगा।
वहीं, कुछ मुस्लिम संगठनों ने प्रस्तावित कानून का विरोध जताया है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि धर्मांतरण और गुमराह कर शादी करने पर पहले से ही कानून है। अतिरिक्त कानून बनाने का कोई औचित्य नहीं है। मौलाना शहाबुद्दीन ने आरोप लगाया कि इस विधेयक से यूपी सरकार कुछ तबकों को भयभीत करना चाहती है।
यूपी के अलावा किन राज्यों में जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ कानून हैं?
उत्तर प्रदेश के अलावा देशभर के 10 राज्यों में जबरन धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हैं। इनमें उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा, गुजरात, झारखंड, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश और ओडिशा शामिल हैं। पिछले साल अगस्त में महाराष्ट्र ने भी जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून लाने का एलान किया था। राज्य के उप-मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि महाराष्ट्र अन्य राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानूनों का अध्ययन कर रहा है और जल्द ही एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लेकर आएगा।
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