Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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न अंगुली, न हथेली, फिर भी मेहनत से अपना भाग्य लिख रहीं कोमल; टॉप कर प्राप्त किया गोल्ड मेडल

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मोदीनगर। कपड़ा मिल परिसर स्थित केएनएमआईईटी से बीटेक(सीएस) की पढ़ाई कर रहीं कोमल की न तो दोनों हथेली हैं और न ही अंगुली हैं। फिर भी वह अपनी मेहनत से अपने सुनहरे भविष्य का निर्माण कर रही हैं। कोमल उन लोगों के लिए भी नजीर हैं, जो हाथों की लकीरों में भाग्य को ढूंढते हैं।
दोनों कलाई से पेन पकड़कर लिखती हैं
हापुड़ रोड स्थित डॉ केएनएमईसी कालेज से सीएस ब्रांच पॉलिटेक्निक में कोमल ने कॉलेज टॉप करते हुए गोल्ड मेडल प्राप्त किया है। फिलहाल वह बीटेक द्वितीय वर्ष में हैं। दोनों कलाई से पैन को पकड़कर वह सामान्य व्यक्ति से भी तेजी से लिखती हैं। इतना ही नहीं, लिखावट भी बहुत साफ और शानदार है। खास बात यह है कि सामान्य व्यक्ति की तरह वह बाइक, स्कूटी, साइकिल भी चलाती हैं।
कॉलेज प्रबंधन ने माफ की फीस
उनकी प्रतिभा को देखते हुए कॉलेज प्रबंधन ने उनकी पूरी फीस माफ करने का निर्णय लिया है। हाल ही में उनकी प्रतिभा को देखते हुए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने भी उनको सम्मानित किया है। डॉ. केएन मोदी यूनिवर्सिटी के दीक्षा समारोह में आए पूर्व राष्ट्रपति ने कोमल संघर्ष से प्रेरणा लेकर जीवन में आगे बढने का पाठ भी पढ़ाया था। कोमल का सपना इंजीनियर बनकर राष्ट्रनिर्माण में योगदान देना है।
कोमल मूलरूप से बागपत के बडौत स्थित बोढा गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता मामन सिंह छोटी जोत के किसान हैं। परिवार की आर्थिक हालत ज्यादा अच्छी नहीं है। उनकी बड़ी बहन सुमन और सपना शादीशुदा हैं। जबकि, एक बहन मीनाक्षी व सावन है। वे परिवार में चौथे नंबर की हैं।
हादसे में चले गए हाथ, समय की मारी हैं कोमल
कोमल ने बताया कि जब वे पांच साल की थी। तब वे अपने पिता के साथ ट्रैक्टर पर बैठकर खेत में गई थीं। उनके पिता खेत की जुताई कर रहे थे। इसी दौरान वे ट्रैक्टर से नीचे गिर गईं और पीछे हैरो के नीचे आ गईं। इस हादसे में उनके दोनों हाथ, कलाई के पास से कट गए। शरीर के अन्य हिस्सों में भी चोट आईं। काफी उपचार के बाद उनकी जान तो बच गई। लेकिन हाथ सदा सदा के लिए चले गए। दो साल पहले उनकी मां गीता देवी का भी कैंसर की बीमारी में निधन हो गया।