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22वें दिन ही दाखिल कर दी थी चार्जशीट, सप्ताह भर में कराया डीएनए परीक्षण

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नई दिल्ली। सामूहिक दुष्कर्म की शिकार 11 वर्षीय बच्ची को न्याय दिलाने में खोड़ा थाना पुलिस की प्रभावी पैरवी ने अहम भूमिका निभाई। पुलिस ने समय से साक्ष्य एकत्र करके रिपोर्ट दर्ज होने के 22वें दिन ही न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की थी। उसके दूसरे दिन पीड़िता की गवाही कराई थी। हरदिन विधि विज्ञान प्रयोगशाला, निवाड़ी जाकर सप्ताह भर में डीएनएन परीक्षण कराया। पुलिस यदि जरा सी भी लापरवाही करती तो शायद पीड़िता को इतनी जल्द सजा न मिल पाती।
रिपोर्ट दर्ज होते ही शुरू कर दी विवेचना
पीड़ित बच्ची पांच सितंबर को स्वजन के साथ खोड़ा थाना पहुंची थी। पुलिस ने सगे भाईयों प्रदीप व कल्लू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने उसी दिन विवेचना शुरू कर दी थी। आरोपितों के खिलाफ अहम साक्ष्य संकलन करके 22वें दिन 27 सितंबर को चार्जशीट दाखिल कर दी। इस बीच पीड़िता की तबीयत बिगड़ने लगी। मामले में उसकी गवाही बहुत महत्वपूर्ण थी। इस वजह से पुलिस ने 28 सितंबर को उसकी गवाही करा दी। उसी दिन ही पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। आपरेशन के बाद पांच अक्टूबर को उसने स्वस्थ बेटे को जन्म दिया।
क्रम तोड़कर कराया डीएनए परीक्षण
इस मामले में आरोपितों को सजा दिलाने डीएनएन जांच ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस को समय से पहले डीएनए परीक्षण कराने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी थी। तत्कालीन खोड़ा थाना प्रभारी अल्ताफ अंसारी ने आरोपितों और पीड़िता के बेटे का डीएनए परीक्षण का नमूना भराया। क्रम के अनुसार परीक्षण में कई माह का समय लगता। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए सप्ताहभर लगातार विधि-विज्ञान प्रयोगशाला, निवाड़ी में पैरवी की। उसका सकारात्मक नतीजा निकला और क्रम तोड़कर डीएनए परीक्षण हुआ। उसमें स्पष्ट हो गया कि बेटा प्रदीप का है।
20 पेज की चार्जशीट और 50 की केस डायरी
पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ 20 पेज की चार्जशीट दाखिल की थी। 50 पेज की केस डायरी लगाई थी। 40 पेज चिकित्सा संबंधी प्रमाण पत्र लगाए थे। उनमें पैथालाजी की रिपोर्ट सहित अन्य प्रमाण पत्र थे। इन सब साक्ष्यों ने केस को काफी मजबूत किया। आरोपितों को सजा मिली।

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