Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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S. Jaishankar: जयशंकर ने कहा 'संयुक्त राष्ट्र अभी भी 1945 में फंसा है', विकासशील देशों की आवाज़ बुलंद करने की ज़रूरत

S. Jaishankar: भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित United Nations Troop Contributing Countries (UNTCC) Conclave में भाग लिया और एक बार फिर United Nations reform की जरूरत पर जोर दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज का UN अभी भी 1945 के समय की वास्तविकताओं को दर्शाता है, जबकि दुनिया 2025 में पूरी तरह बदल चुकी है। विदेश मंत्री ने कहा कि UN को अब अधिक inclusive, democratic और representative बनाना होगा ताकि यह विकासशील देशों की आवाज़ और emerging Global South की आकांक्षाओं को सही रूप में प्रतिबिंबित कर सके। उनके अनुसार, UN credibility इस बदलाव पर ही निर्भर करती है।
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S. Jaishankar: भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित United Nations Troop Contributing Countries (UNTCC) Conclave में भाग लिया और एक बार फिर United Nations reform की जरूरत पर जोर दिया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज का UN अभी भी 1945 के समय की वास्तविकताओं को दर्शाता है, जबकि दुनिया 2025 में पूरी तरह बदल चुकी है। विदेश मंत्री ने कहा कि UN को अब अधिक inclusive, democratic और representative बनाना होगा ताकि यह विकासशील देशों की आवाज़ और emerging Global South की आकांक्षाओं को सही रूप में प्रतिबिंबित कर सके। उनके अनुसार, UN credibility इस बदलाव पर ही निर्भर करती है।


जयशंकर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि हाल ही में उन्होंने 80th UN General Assembly में भाग लिया और वहां से यह स्पष्ट हुआ कि समय के साथ UN members की संख्या चौगुनी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि जिन संस्थाओं में बदलाव नहीं आता, उनका relevance धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। इस संदर्भ में उन्होंने सुझाव दिया कि UN Security Council में भी विस्तार और सुधार जरूरी है, ताकि वैश्विक निर्णय और peacekeeping missions में सभी देशों की भूमिका को बेहतर तरीके से शामिल किया जा सके।


विदेश मंत्री ने UN Peacekeeping Forces की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय peace soldiers हमेशा बहादुरी और समर्पण के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि अब तक 4000 से अधिक शांति सैनिकों ने अपने कर्तव्य में सर्वोच्च बलिदान दिया है। जयशंकर ने यह भी सुझाव दिया कि जिन देशों में peacekeeping missions भेजी जाती हैं और जिन देशों के सैनिक इसमें शामिल होते हैं, उनके साथ भी मिशन की योजना और रणनीति पर व्यापक consultation होनी चाहिए। इससे मिशनों की सफलता और प्रभावशीलता में बढ़ोतरी होगी।


अंत में, Dr. Jaishankar ने स्पष्ट किया कि संयुक्त राष्ट्र के सुधार में सभी member countries की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि UN विश्वसनीय और प्रभावी बने रहना चाहता है, तो उसे multilateralism के मूल सिद्धांतों को मजबूत करना होगा और विकासशील देशों की आवाज़ को सुनना होगा। उनके अनुसार, ये बदलाव न केवल global governance को बेहतर बनाएंगे बल्कि शांति और सुरक्षा के प्रयासों को भी नई दिशा देंगे।