फ़लस्तीनियों को अपनी ज़मीन पर सुरक्षित जीवन मिलना चाहिए- UN Deputy Special Coordinator

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United Nations में Middle East Peace Process के Deputy Special Coordinator Ramiz Alakbarov ने सुरक्षा परिषद (Security Council) को संबोधित करते हुए कहा कि फ़लस्तीन की स्थिति इतिहास के सबसे गंभीर दौर से गुज़र रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मौजूदा हालात जारी रहे तो Gaza और West Bank में मानवीय संकट और गहराएगा। 


गाज़ा (Gaza) में पिछले 22 महीनों से जारी hostilities ने हालात को और भयावह बना दिया है। UN रिपोर्ट के अनुसार जुलाई से अब तक 2,500 से अधिक फ़लस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें बच्चे और पत्रकार भी शामिल हैं। Alakbarov ने कहा कि Israeli strikes ने अस्पतालों, स्कूलों और IDP camps को भी निशाना बनाया है। वहीं hostages अब भी अमानवीय हालात में क़ैद हैं। उन्होंने कहा कि Gazans अब famine जैसी स्थिति झेल रहे हैं और 86% इलाका Israeli military zones में तब्दील हो चुका है।


West Bank और East Jerusalem में भी हालात गंभीर होते जा रहे हैं। Settlement expansion, मकानों की तोड़फोड़ और बढ़ती हिंसा ने शांति की संभावनाओं को खत्म कर दिया है। सिर्फ़ अगस्त में ही सैकड़ों फ़लस्तीनियों को विस्थापित होना पड़ा। Alakbarov ने कहा कि “Palestinians must be able to live safely on their land.” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि E1 area में 3,400 housing units का approval दो-राज्य समाधान (Two-State Solution) को असंभव बना देगा।


UN अधिकारी ने सभी पक्षों से तत्काल ceasefire, hostages की रिहाई और humanitarian aid को सुरक्षित पहुँचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह युद्ध “basic humanity” को चुनौती दे रहा है और अब bold action की ज़रूरत है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मिलकर राजनीतिक समाधान खोजना होगा। उन्होंने फ्रांस और सऊदी अरब द्वारा आयोजित High-Level Conference on Two-State Solution का स्वागत किया और कहा कि यही एकमात्र रास्ता है जिससे Middle East में स्थायी शांति बहाल हो सकती है।

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