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अमेरिका की कार्रवाई से वेनेजुएला तेल सेक्टर में बदलाव, भारत को मिल सकता है अरबों डॉलर का फायदा
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़े बदलाव की संभावना बन गई है।
- sakshi choudhary
- 04 Jan, 2026
अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़े बदलाव की संभावना बन गई है। भारत सरकार ने इस घटनाक्रम पर चिंता जताई है, लेकिन बदले हालात भारत के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकते हैं। लंबे समय से अटके भारत के करीब एक अरब अमेरिकी डॉलर के बकाया भुगतान की वसूली का रास्ता खुल सकता है और वेनेजुएला में भारतीय कंपनियों द्वारा तेल उत्पादन दोबारा शुरू होने की उम्मीद बढ़ गई है।
अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले भारत वेनेजुएला से रोजाना चार लाख बैरल से ज्यादा कच्चे तेल का आयात करता था। प्रतिबंधों के कारण 2022 में यह आयात बंद करना पड़ा। ओएनजीसी विदेश लिमिटेड पूर्वी वेनेजुएला के सैन क्रिस्टोबल तेल क्षेत्र में संयुक्त संचालन करती है, लेकिन तकनीक और उपकरणों की कमी के चलते उत्पादन घटकर पांच से दस हजार बैरल प्रतिदिन रह गया। अब प्रतिबंधों में ढील मिलने की संभावना से उत्पादन बढ़ने और अटके बकाये की भरपाई की उम्मीद जताई जा रही है।
इस घटनाक्रम का असर रूस पर भी पड़ सकता है। भारत हाल के वर्षों में तेल आयात के लिए विविध स्रोत तलाश रहा है और वेनेजुएला से खरीद बढ़ने पर रूस से आयात कम हो सकता है। ओएनजीसी और अन्य भारतीय कंपनियां कैराबोबो-1 जैसे भारी तेल क्षेत्रों में भी निवेश कर सकती हैं। विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका की भूमिका से वेनेजुएला की राष्ट्रीय तेल कंपनी PdVSA के पुनर्गठन की प्रक्रिया तेज हो सकती है, जिससे वैश्विक तेल उत्पादन और आपूर्ति संतुलन पर असर पड़ेगा।
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