मनीष सिसोदिया ने भी जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की कोर्ट से दूरी बनाई, चिट्ठी लिखकर किया पेश न होने का ऐलान

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दिल्ली की आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मामले में बड़ा राजनीतिक और कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) नेता मनीष सिसोदिया ने दिल्ली हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत में न तो खुद पेश होने और न ही अपने वकील को भेजने का फैसला किया है। सिसोदिया ने इस संबंध में न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को एक पत्र लिखकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। इससे पहले पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल भी इसी मामले में अदालत से दूरी बनाने का ऐलान कर चुके हैं, जिससे राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है।


सिसोदिया ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई की उम्मीद नहीं है और उन्होंने इसे “सत्याग्रह” से जोड़ा है। उन्होंने लिखा कि अब उनके पक्ष में कोई वकील भी पेश नहीं होगा। उन्होंने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की भूमिका का उल्लेख करते हुए न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। यह कदम ऐसे समय में आया है जब हाईकोर्ट में सीबीआई की उस अपील पर सुनवाई चल रही है जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा आबकारी घोटाले के सभी 23 आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है।


इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में 13 अप्रैल को केजरीवाल द्वारा व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर न्यायमूर्ति शर्मा से खुद को केस से अलग करने की मांग शामिल है, जिसे अदालत ने 20 अप्रैल को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि न्यायपालिका पर अविश्वास फैलाना उचित नहीं है। इसके बाद सिसोदिया का यह कदम सामने आया है, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है। अब इस घटनाक्रम ने राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नई बहस को जन्म दे दिया है।

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