नेपाल में 45 दिन बाद फिर कुदरत का कहर! बूढ़ी गंडकी नदी में भीषण बाढ़, 40 घर बहे, 5 लोग लापता
- sakshi choudhary
- 11 Oct, 2026
नेपाल में करीब 45 दिन बाद एक बार फिर भीषण बाढ़ ने तबाही मचा दी है। रविवार, 11 अक्टूबर को गोरखा जिले में बूढ़ी गंडकी नदी अचानक उफान पर आ गई। बाढ़ का पानी, काला कीचड़ और भारी मलबा इतनी तेजी से आगे बढ़ा कि नदी किनारे बसे कई इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इस आपदा में करीब 35 से 40 घर बह गए हैं, जबकि पांच लोग लापता बताए जा रहे हैं। कई पुल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं और चार जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है। हालांकि, राहत की बात यह है कि शुरुआती रिपोर्ट में किसी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। नेपाली प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है।
नेपाल में आई इस अचानक बाढ़ की मुख्य वजह भारी बारिश नहीं, बल्कि भूस्खलन को बताया जा रहा है। भूवैज्ञानिक टीम के मुताबिक, गोरखा जिले के चुमनुब्री क्षेत्र में लोकपा और चुलीदांडा के बीच भूस्खलन होने से भारी मलबा नदी में गिर गया और बूढ़ी गंडकी का बहाव रुक गया। इससे नदी में अस्थायी प्राकृतिक बांध जैसी स्थिति बन गई। रविवार तड़के करीब चार से साढ़े चार बजे के बीच यह अवरोध टूट गया, जिसके बाद जमा पानी और मलबा तेज रफ्तार से नीचे की ओर बहने लगा। आरुघाट में नदी का जलस्तर खतरे के निशान पांच मीटर के मुकाबले 8.3 मीटर तक पहुंच गया। बाढ़ का असर जगत बगर, सल्लेरी, घट्टेखोला और पैयुं समेत कई इलाकों में देखने को मिला। गोरखा और धादिंग को जोड़ने वाले पुल का करीब 22 मीटर हिस्सा बह गया, जबकि कई लोहे और सस्पेंशन पुल भी क्षतिग्रस्त हो गए।
इस आपदा के बीच नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र प्रहरी बल की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। अधिकारियों के मुताबिक, अब तक 47 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। बचाव अभियान में 387 सुरक्षाकर्मियों और नेपाली सेना के चार हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। प्रशासन ने नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी है। स्थानीय लोगों की सतर्कता और समय पर जारी चेतावनियों से बड़े पैमाने पर जनहानि को रोकने में मदद मिली। हालांकि, भूस्खलन का मलबा अब भी नदी के बहाव को प्रभावित कर सकता है, जिससे दोबारा अचानक बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है। ऐसे में बूढ़ी गंडकी और त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में निगरानी जारी है।