BrahMos Missile: 2028 तक आएगी नई पीढ़ी की मिसाइल, भारत की सैन्य ताकत और डिफेंस एक्सपोर्ट को मिलेगा बढ़ावा
- sakshi choudhary
- 22 Oct, 2026
भारत की ब्रह्मोस मिसाइल अब देश की सैन्य ताकत के साथ-साथ डिफेंस एक्सपोर्ट की भी बड़ी पहचान बनती जा रही है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान इस मिसाइल के इस्तेमाल के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी चर्चा और मांग बढ़ी है। इसी बीच भारत ब्रह्मोस की अगली पीढ़ी यानी BrahMos-NG पर काम कर रहा है। नई मिसाइल को मौजूदा ब्रह्मोस से छोटा और हल्का बनाने की योजना है, जिससे इसे ज्यादा तरह के लड़ाकू विमानों और दूसरे प्लेटफॉर्म से इस्तेमाल किया जा सकेगा। हालांकि, नई मिसाइल के 2028 तक आने से जुड़ी समयसीमा और इसकी क्षमताओं की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
ब्रह्मोस-NG में क्या होंगे खास फीचर्स?
ब्रह्मोस-NG यानी नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल को मौजूदा ब्रह्मोस का ज्यादा कॉम्पैक्ट और हल्का वर्जन बनाने की दिशा में विकसित किया जा रहा है। इसका मकसद भारतीय सशस्त्र बलों को ऐसी मिसाइल उपलब्ध कराना है, जिसे अलग-अलग सैन्य प्लेटफॉर्म पर तैनात करना आसान हो। इसके संभावित फीचर्स में कम वजन, छोटा आकार और बेहतर ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी शामिल हैं। इससे भविष्य में हल्के लड़ाकू विमानों पर भी इसके इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, इसकी अंतिम तकनीकी खूबियां और तैनाती का समय आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद ब्रह्मोस की बढ़ी चर्चा
मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ब्रह्मोस के इस्तेमाल के बाद इस मिसाइल की क्षमता को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हुई। ब्रह्मोस एयरोस्पेस के CEO और MD डॉ. जयतीर्थ जोशी के मुताबिक, मिसाइल की निर्यात सफलता की शुरुआत युद्ध में इस्तेमाल होने से पहले ही हो चुकी थी। वर्ष 2022 में फिलीपींस के साथ हुआ समझौता भारत के लिए एक बड़ा कदम था। अब भारत दक्षिण-पूर्व एशिया के दूसरे देशों में भी अपने रक्षा उत्पादों की पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, अलग-अलग देशों के साथ संभावित सौदों और ऑर्डर की स्थिति को लेकर आधिकारिक घोषणाओं को ही अंतिम आधार माना जाना चाहिए।
भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट को कैसे मिलेगा फायदा?
भारत का रक्षा निर्यात तेजी से बढ़ा है और ब्रह्मोस जैसे आधुनिक हथियार इसमें अहम भूमिका निभा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का रक्षा निर्यात 38,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। ब्रह्मोस की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग को पूरा करने के लिए कंपनी अपनी सप्लाई चेन और उत्पादन क्षमता मजबूत करने पर काम कर रही है। इसके साथ ही औद्योगिक भागीदारों की संख्या बढ़ाने की योजना भी है, ताकि उत्पादन में तेजी लाई जा सके और गुणवत्ता बनाए रखी जा सके। यदि ब्रह्मोस-NG का विकास और परीक्षण तय योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो भविष्य में भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को और मजबूती मिल सकती है।
लंबी दूरी की मिसाइलों पर भी भारत का फोकस
ब्रह्मोस-NG के अलावा भारत लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइल तकनीक पर भी काम कर रहा है। 1,500 किलोमीटर तक की रेंज वाली मिसाइल से जुड़ी योजनाओं की चर्चा के बीच यह समझना जरूरी है कि अलग-अलग मिसाइल कार्यक्रमों की तकनीक, उद्देश्य और विकास की स्थिति अलग होती है। ऐसी क्षमताओं के विकास से भारत की रणनीतिक पहुंच बढ़ सकती है, लेकिन किसी भी मिसाइल की वास्तविक रेंज, तैनाती और उपलब्धता के बारे में आधिकारिक जानकारी को ही सही माना जाना चाहिए।