महाकुंभ में विदेशी किशोरों का सनातन धर्म में रुझान

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संगम नगरी में चल रहे महाकुंभ ने न केवल भारतीयों को बल्कि विदेशी युवाओं को भी सनातन धर्म की ओर आकर्षित किया है। रूस, अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों से आए बाल और किशोर संन्यासियों ने भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म को अपनाते हुए एक नई दिशा दी है।

रूस के 11 वर्षीय दिमित्रो और 13 वर्षीय डेनियल ने संन्यास धारण कर वेदों का अध्ययन शुरू कर दिया है। ये दोनों अब संस्कृत सीख रहे हैं ताकि श्लोकों का शुद्ध उच्चारण कर सकें। इसी तरह, न्यूयॉर्क से आए 15 वर्षीय लियाम ने संगम स्नान कर अपने बाल मुंडवाए और चोटी रख ली। वे दुर्गा चालीसा, हनुमान चालीसा और वेद पाठ का अभ्यास कर रहे हैं।

विदेशी किशोर कठिन कल्पवास जीवन शैली में रमकर पूजा-पद्धति और ध्यान-साधना सीख रहे हैं। महामंडलेश्वर के शिविरों में जापान, रूस और नेपाल के कई किशोर संन्यासियों का साधना में लीन होना महाकुंभ की वैश्विक प्रतिष्ठा को दर्शाता है।

महाकुंभ में 12 राज्यों के पवेलियन भारत की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित कर रहे हैं। मध्य प्रदेश का भगोरिया नृत्य और नागालैंड का चांगलो लोकनृत्य दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं। यह महाकुंभ भारत की सांस्कृतिक विरासत और विश्व बंधुत्व का अद्भुत संदेश दे रहा है।

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