Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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पद और पैसे से बढ़कर है जीवन: त्रिपुरा DGP की घटना से समाज को बड़ा संदेश

त्रिपुरा के डीजीपी अनुराग धनखड़ के निधन की खबर हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि जीवन में पद, पैसा और प्रतिष्ठा ही सब कुछ नहीं हैं। मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक रिश्ते, आत्मिक शांति और अपनों का साथ भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सफलता तभी सार्थक है, जब व्यक्ति भीतर से भी स्वस्थ और संतुष्ट हो।
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त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग धनखड़ के निधन की खबर केवल एक अधिकारी के जाने की खबर नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए एक गहरा संदेश भी है। प्रथम दृष्टया आत्महत्या की आशंका जताई जा रही है, हालांकि इसकी पुष्टि जांच के बाद ही होगी। ऐसे समय में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।

लेकिन यह घटना हमें एक महत्वपूर्ण सवाल पूछने पर मजबूर करती है—क्या जीवन में केवल ऊँचा पद, अच्छा वेतन और सामाजिक प्रतिष्ठा ही सब कुछ है?

हम अक्सर मान लेते हैं कि जो व्यक्ति बड़े पद पर है, जिसके पास पैसा है और सम्मान है, उसके जीवन में कोई कमी नहीं होगी। जबकि सच्चाई यह है कि हर व्यक्ति अपने भीतर एक ऐसा संघर्ष लड़ रहा होता है, जो बाहर से दिखाई नहीं देता। मानसिक तनाव, अकेलापन, जिम्मेदारियों का बोझ और भावनात्मक दबाव किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकते हैं।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम करियर बनाने में इतने व्यस्त हो गए हैं कि रिश्तों, परिवार, दोस्तों और अपने मानसिक स्वास्थ्य को समय देना भूलते जा रहे हैं। सफलता की दौड़ में यदि मन की शांति खो जाए, तो वह सफलता भी अधूरी रह जाती है।

इस घटना से हमें सीख लेनी चाहिए कि अपने आसपास के लोगों से संवाद बनाए रखें। यदि कोई व्यक्ति चुप रहने लगा है, तनाव में दिखता है या पहले जैसा व्यवहार नहीं कर रहा, तो उससे बात करें। कई बार एक सच्ची बातचीत, एक अपनापन भरा साथ और यह एहसास कि “आप अकेले नहीं हैं”, किसी की जिंदगी बदल सकता है।

जीवन ईश्वर का सबसे अनमोल उपहार है। पद, पैसा और प्रतिष्ठा दोबारा मिल सकते हैं, लेकिन जीवन नहीं।

आइए, हम ऐसा समाज बनाएं जहाँ सफलता के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संबंध और मानवीय संवेदनाओं को भी समान महत्व मिले। क्योंकि अंत में इंसान की पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके जीवन, उसके रिश्तों और उसके भीतर की शांति से होती है।

“पद और पैसा जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन जीवन का उद्देश्य नहीं। अपनों के साथ बिताया समय, मानसिक शांति और स्वस्थ मन ही असली संपत्ति है।”