Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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Kerala: केरल में बढ़ता ‘ब्रेन ईटिंग अमीबा’ का खतरा, कोझिकोड में एक और महिला संक्रमित

Kerala: केरल इन दिनों एक घातक संक्रमण की चपेट में है जिसे ‘ब्रेन ईटिंग अमीबा’ कहा जाता है। उत्तरी केरल के कोझिकोड जिले में अमीबिक इंसेफेलाइटिस का नया मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक 43 वर्षीय महिला में लक्षण पाए गए थे और जांच के बाद उसमें संक्रमण की पुष्टि हुई। इस मामले के बाद कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में इलाज करा रहे मरीजों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है, जिनमें 4 बच्चे भी शामिल हैं। इससे पहले 16 अगस्त को इसी जिले में 9 वर्षीय बच्ची की इस संक्रमण से मौत हो चुकी है, जिससे स्थानीय स्तर पर दहशत का माहौल है।
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Kerala: केरल इन दिनों एक घातक संक्रमण की चपेट में है जिसे ‘ब्रेन ईटिंग अमीबा’ कहा जाता है। उत्तरी केरल के कोझिकोड जिले में अमीबिक इंसेफेलाइटिस का नया मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक 43 वर्षीय महिला में लक्षण पाए गए थे और जांच के बाद उसमें संक्रमण की पुष्टि हुई। इस मामले के बाद कोझिकोड मेडिकल कॉलेज में इलाज करा रहे मरीजों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है, जिनमें 4 बच्चे भी शामिल हैं। इससे पहले 16 अगस्त को इसी जिले में 9 वर्षीय बच्ची की इस संक्रमण से मौत हो चुकी है, जिससे स्थानीय स्तर पर दहशत का माहौल है।


संक्रमण से बढ़ी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर मरीज कोझिकोड, वायनाड और मलप्पुरम जिलों से हैं। नेगलेरिया फाउलेरी नामक अमीबा के कारण होने वाला यह संक्रमण मस्तिष्क की कोशिकाओं को नष्ट करता है और इसकी मृत्युदर बेहद अधिक मानी जाती है। पिछले वर्ष भी राज्य में इस तरह के मामले सामने आए थे। अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को सतर्क रहने और दूषित पानी के संपर्क से बचने की सलाह दी है। खासतौर पर पानी में डुबकी लगाने वाले लोगों को संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है, क्योंकि यह अमीबा नाक के जरिए शरीर में प्रवेश कर मस्तिष्क तक पहुंच जाता है।


क्या है ‘ब्रेन ईटिंग अमीबा’?

अमीबिक इंसेफेलाइटिस मस्तिष्क का एक दुर्लभ लेकिन घातक संक्रमण है। इसे वैज्ञानिक भाषा में Primary Amoebic Meningoencephalitis (PAM) भी कहा जाता है। यह संक्रमण शुरुआती दौर में फ्लू जैसे लक्षण पैदा करता है जिनमें सिरदर्द, बुखार, उल्टी और थकान शामिल है। लेकिन गंभीर स्थिति में यह बीमारी गर्दन में अकड़न, भ्रम, दौरे, कोमा और अंततः मौत का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लक्षण संक्रमण के 5 से 18 दिनों के भीतर तेजी से विकसित होते हैं और समय पर इलाज न मिलने पर यह प्राणघातक साबित हो सकता है।


बचाव ही है सबसे बड़ा उपाय

चूंकि इस संक्रमण का इलाज बेहद कठिन और सीमित है, इसलिए बचाव ही इसका सबसे महत्वपूर्ण उपाय माना जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को दूषित या असुरक्षित पानी से दूर रहने की सलाह दी है। पानी में तैरने या डुबकी लगाने से पहले सतर्कता बरतनी जरूरी है। संक्रमण फैलने के बढ़ते मामलों को देखते हुए केरल में अलर्ट जारी किया गया है। फिलहाल स्वास्थ्य अधिकारी लोगों से जागरूकता और सतर्कता बरतने की अपील कर रहे हैं ताकि ‘ब्रेन ईटिंग अमीबा’ के खतरे को कम किया जा सके।

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