Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा भूमि घोटाले में सह-आरोपियों के खिलाफ केस चलाने का दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा भूमि घोटाले से जुड़े मामले में ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। ट्रायल कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या करते हुए सभी सह-आरोपियों को राहत दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट का आदेश केवल उस आरोपी पर लागू होता है जिसने याचिका दायर की थी, और इसे अन्य सह-आरोपियों पर स्वतः लागू नहीं माना जा सकता। जस्टिस आह्वानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि इस गलत व्याख्या के कारण अन्य आरोपियों ने भी राहत पाने का प्रयास किया, जो कानूनी दृष्टि से सही नहीं है।
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सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा भूमि घोटाले से जुड़े मामले में ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। ट्रायल कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या करते हुए सभी सह-आरोपियों को राहत दे दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट का आदेश केवल उस आरोपी पर लागू होता है जिसने याचिका दायर की थी, और इसे अन्य सह-आरोपियों पर स्वतः लागू नहीं माना जा सकता। जस्टिस आह्वानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि इस गलत व्याख्या के कारण अन्य आरोपियों ने भी राहत पाने का प्रयास किया, जो कानूनी दृष्टि से सही नहीं है।


इस मामले में आरोप है कि चिटहेरा गांव की लगभग 300 बीघा जमीन किसानों से दबाव में कम कीमत पर खरीदी गई थी। 2022 में गौतम बुद्ध नगर में दर्ज प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए थे। इसके अलावा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की प्रावधान भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को अनावश्यक व्याख्या संबंधी मुद्दे उठाने से बचने और सह-आरोपियों की याचिकाओं को तीन महीने के भीतर निपटाने का निर्देश दिया।


अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार से भी पूछा कि किसानों से ली गई जमीन के मामले में अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। दिसंबर 2025 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी मालू को राहत दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह राहत केवल मालू के लिए थी। सुप्रीम कोर्ट ने मालू को छोड़कर सभी सह-आरोपियों के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही फिर से शुरू करने का निर्देश दिया। अदालत का यह फैसला किसानों के हित और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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