Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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रूसा फंड के 10 करोड़ के कथित दुरुपयोग का मामला: जीबीयू में भ्रष्टाचार के आरोप तेज

ग्रेटर नोएडा स्थित गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी (जीबीयू) में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत मिले 10 करोड़ रुपये के फंड के कथित दुरुपयोग को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि इस फंड का उपयोग वास्तविक विकास कार्यों में न होकर केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रखा गया और फर्जी उपयोगिता प्रमाणपत्र (Utilization Certificate) शिक्षा मंत्रालय को सौंप दिया गया। इस पूरे मामले में तत्कालीन कुलसचिव डॉ. विश्वास त्रिपाठी की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, 2021 में जारी इस फंड का बड़ा हिस्सा बैंक खातों में ही पड़ा रहा, जबकि दस्तावेजों में उसे खर्च दिखा दिया गया।
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ग्रेटर नोएडा स्थित गौतमबुद्ध यूनिवर्सिटी (जीबीयू) में राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के तहत मिले 10 करोड़ रुपये के फंड के कथित दुरुपयोग को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि इस फंड का उपयोग वास्तविक विकास कार्यों में न होकर केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रखा गया और फर्जी उपयोगिता प्रमाणपत्र (Utilization Certificate) शिक्षा मंत्रालय को सौंप दिया गया। इस पूरे मामले में तत्कालीन कुलसचिव डॉ. विश्वास त्रिपाठी की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, 2021 में जारी इस फंड का बड़ा हिस्सा बैंक खातों में ही पड़ा रहा, जबकि दस्तावेजों में उसे खर्च दिखा दिया गया।


जानकारी के मुताबिक, 5 जनवरी 2021 को गठित समिति के कुछ सदस्यों ने रूसा फंड के उपयोग को लेकर आपत्ति जताई थी। आरोप है कि आपत्ति करने वाले सदस्यों को समिति से बाहर कर दिया गया और बाद में नए सदस्यों को शामिल कर एक नई समिति गठित की गई। इसके बाद फंड के उपयोग से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता की कमी और मनमानी के आरोप सामने आए। आगे चलकर आरोप यह भी लगे कि किसी भी प्रकार का वास्तविक निर्माण या विकास कार्य नहीं कराया गया, लेकिन कागजों में पूरी राशि खर्च दिखा दी गई।


यह भी आरोप लगाया गया है कि कार्यों के लिए सरकारी एजेंसी की बजाय निजी एजेंसी को ठेका दिया गया और निविदा एवं ऑडिट प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कथित रूप से एनबीसीसी जैसी नाम मिलती-जुलती निजी एजेंसी को काम सौंपने का दावा किया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। रूसा योजना का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्ता सुधार, बुनियादी ढांचे का विकास और सुविधाओं का विस्तार करना है, लेकिन इस मामले ने इसके क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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