Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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नोएडा की कंपनी के वर्चुअल वॉलेट पर साइबर हमला, करोड़ों की बिटकॉइन और क्रिप्टो करेंसी गायब

दिल्ली-एनसीआर के नोएडा से करोड़ों रुपये की क्रिप्टो करेंसी और बिटकॉइन गायब होने का बड़ा मामला सामने आया है। सेक्टर-62 स्थित एक कंपनी के संचालक ने अपने कारोबारी साझेदार और अन्य लोगों पर डिजिटल वॉलेट से बिना अनुमति क्रिप्टो संपत्तियां ट्रांसफर करने का आरोप लगाया है। शिकायत के बाद साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि वर्चुअल वॉलेट की गोपनीय जानकारी हासिल कर करोड़ों की डिजिटल करेंसी गायब की गई।
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दिल्ली-एनसीआर के नोएडा से करोड़ों रुपये की क्रिप्टो करेंसी और बिटकॉइन गायब होने का बड़ा मामला सामने आया है। सेक्टर-62 स्थित एक कंपनी के संचालक ने अपने कारोबारी साझेदार और अन्य लोगों पर डिजिटल वॉलेट से बिना अनुमति क्रिप्टो संपत्तियां ट्रांसफर करने का आरोप लगाया है। शिकायत के बाद साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। आरोप है कि वर्चुअल वॉलेट की गोपनीय जानकारी हासिल कर करोड़ों की डिजिटल करेंसी गायब की गई।


शिकायतकर्ता प्रतीक गौरी के अनुसार, उन्होंने अपने साझेदार प्रतीक द्विवेदी के साथ मिलकर तुर्क और कैकोस द्वीप समूह में “फाइवआयर टेक्नोलॉजी” नाम से फॉरेन एक्सचेंज कंपनी बनाई थी। कंपनी ने ‘सिंपल एग्रीमेंट फॉर फ्यूचर टोकन्स’ यानी SAFT मॉडल के जरिए करीब 2 करोड़ 10 लाख अमेरिकी डॉलर जुटाए थे। निवेशकों की रकम को सुरक्षित रखने के लिए 13 डिजिटल वॉलेट बनाए गए थे, जिनमें बिटकॉइन, यूएसडीटी और अन्य क्रिप्टो संपत्तियां रखी गई थीं। आरोप है कि अगस्त 2025 से कुछ लोगों ने मिलकर साजिश के तहत इन वॉलेट्स तक पहुंच बनाई और रकम ट्रांसफर कर दी।


जांच में सामने आया है कि दुबई में हुई एक बैठक के दौरान सुरक्षा के नाम पर सभी के मोबाइल फोन अलग रखवा लिए गए थे। इसी दौरान वर्चुअल वॉलेट के पिन और पासवर्ड तक पहुंच हासिल की गई। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि क्रिप्टो निवेशकों को हमेशा टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन का इस्तेमाल करना चाहिए और अपने वॉलेट की जानकारी किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। फिलहाल पुलिस डिजिटल ट्रांजैक्शन और ब्लॉकचेन रिकॉर्ड की जांच कर आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।