बारिश का मौसम शुरू होते ही ग्रेटर नोएडा की कई सड़कें और कॉलोनियां जलभराव की समस्या से जूझने लगती हैं। सोशल मीडिया पर बंद नालियों, पानी से लबालब सड़कों और गंदगी की तस्वीरें तेजी से वायरल होती हैं, जिसके बाद सबसे बड़ा सवाल उठता है कि आखिर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण क्या कर रहा है। यह सवाल पूरी तरह उचित भी है क्योंकि शहर की सफाई, नालों की नियमित देखरेख और बेहतर जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करना प्राधिकरण की जिम्मेदारी है। जहां कहीं सफाई में लापरवाही होती है या समय पर नालों की सफाई नहीं होती, वहां प्रशासन को जवाबदेह बनाना भी जरूरी है। लेकिन क्या हर बार जलभराव के लिए सिर्फ सरकारी व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त है, या फिर इस समस्या के पीछे हमारी अपनी आदतें भी उतनी ही जिम्मेदार हैं। यह सवाल अब पूरे शहर को खुद से पूछने की जरूरत है।
अगर किसी भी बड़ी नाली की सफाई के दौरान निकाले गए कचरे पर नजर डालें तो तस्वीर काफी कुछ साफ कर देती है। मिट्टी से अधिक मात्रा में प्लास्टिक की बोतलें, पॉलीथिन, डिस्पोजेबल कप, गुटखे के पाउच, घरेलू कचरा और अन्य अपशिष्ट नालियों से निकलते हैं। यह कचरा किसी मशीन से नहीं बल्कि नागरिकों की लापरवाही का परिणाम होता है। कई लोग अपने घरों और दुकानों का कूड़ा नालियों या सड़कों पर फेंक देते हैं, जिससे जल निकासी का रास्ता पूरी तरह बाधित हो जाता है। ऐसे में बारिश का पानी निकल नहीं पाता और सड़कें तालाब में बदल जाती हैं। इसके बाद पूरा दोष प्राधिकरण पर डाल दिया जाता है, जबकि समस्या की जड़ में हमारी अपनी असावधानी भी शामिल होती है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने घर, दुकान और आसपास की नालियों को कूड़े और प्लास्टिक से मुक्त रखने का संकल्प ले, तो जलभराव की घटनाओं में काफी हद तक कमी लाई जा सकती है।
ग्रेटर नोएडा को स्वच्छ, सुंदर और विश्वस्तरीय शहर बनाने की जिम्मेदारी केवल प्राधिकरण की नहीं बल्कि यहां रहने वाले प्रत्येक नागरिक की भी है। निश्चित रूप से कई स्थानों पर नियमित सफाई, बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था और प्रभावी निगरानी की जरूरत है, जिस पर प्राधिकरण को गंभीरता से काम करना चाहिए। वहीं दूसरी ओर नागरिकों को भी यह समझना होगा कि अधिकार और कर्तव्य साथ-साथ चलते हैं। यदि हम शहर को सिंगापुर जैसा देखना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें अपने व्यवहार में बदलाव लाना होगा। बारिश के दौरान जलभराव की तस्वीरें साझा करने से पहले यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि हमने स्वयं कभी कूड़ा नालियों या सार्वजनिक स्थानों पर न फेंका हो। जिस दिन प्रत्येक नागरिक ईमानदारी से यह कह सकेगा कि उसने अपने शहर को स्वच्छ रखने का पूरा प्रयास किया है, उसी दिन ग्रेटर नोएडा वास्तव में एक योजनाबद्ध ही नहीं बल्कि जिम्मेदार नागरिकों वाला आदर्श शहर बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा सकेगा।