ग्रेटर नोएडा के तिलपता रोटरी पर लंबे समय से लोगों के लिए परेशानी का कारण बने ट्रैफिक जाम से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने यहां करीब 4 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड बनाने का निर्णय लिया है, जिससे सूरजपुर की ओर से कंटेनर डिपो और दादरी की तरफ जाने वाले वाहनों को बिना जाम में फंसे आवागमन की सुविधा मिल सकेगी। पहले इस स्थान पर अंडरपास और फ्लाईओवर जैसे विकल्पों पर विचार किया जा रहा था, लेकिन विस्तृत समीक्षा के बाद एलिवेटेड रोड निर्माण को सबसे उपयुक्त समाधान माना गया। परियोजना को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी की सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और अब इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए प्राधिकरण ने उत्तर प्रदेश सेतु निगम को 35 लाख रुपये का बजट भी जारी कर दिया है।
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित एलिवेटेड रोड तिलपता रोटरी के समीप स्थित पुलिस चौकी से शुरू होकर कंटेनर डिपो के आगे दादरी रेलवे ओवरब्रिज और रूपबास बाइपास से पहले तक पहुंचेगा। इस परियोजना के पूरा होने के बाद दादरी, जीटी रोड और गाजियाबाद की ओर जाने वाले वाहनों को निर्बाध यातायात की सुविधा मिलेगी। वरिष्ठ प्रबंधक परियोजना विभाग प्रभात शंकर ने बताया कि डीपीआर तैयार करने के लिए विस्तृत सर्वेक्षण किया जाएगा, जिसके आधार पर एलिवेटेड रोड का डिजाइन, निर्माण लागत और अन्य तकनीकी पहलुओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य केवल ट्रैफिक जाम कम करना ही नहीं, बल्कि भविष्य में बढ़ने वाले यातायात दबाव को भी ध्यान में रखते हुए स्थायी समाधान तैयार करना है।
योजना के तहत भारी वाहनों को एलिवेटेड रोड के ऊपर से गुजारा जाएगा, जबकि मौजूदा सड़क को सर्विस लेन के रूप में स्थानीय वाहनों के लिए उपयोग में रखा जाएगा। इससे स्थानीय और लंबी दूरी के यातायात को अलग-अलग मार्ग मिलने से ट्रैफिक संचालन अधिक सुगम होगा और दुर्घटनाओं की संभावना भी कम होगी। तिलपता गोलचक्कर और कंटेनर डिपो क्षेत्र में प्रतिदिन लगने वाले जाम से हजारों वाहन चालक प्रभावित होते हैं, जिसके कारण समय और ईंधन दोनों की बर्बादी होती है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रवि कुमार एनजी ने कहा कि तिलपता क्षेत्र में लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए एलिवेटेड रोड का निर्णय लिया गया है, जिससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। परियोजना पूरी होने के बाद ग्रेटर नोएडा, दादरी और गाजियाबाद के बीच यातायात व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।