Monday, 12 May 2026 | 04:35 PM
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ग्रेटर नोएडा में मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब के बीच बनेगी 80 मीटर चौड़ी सड़क, जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू

ग्रेटर नोएडा में आधुनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
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ग्रेटर नोएडा में आधुनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बोडाकी में विकसित किए जा रहे मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब (एमएमटीएच) के बीच से गुजरने वाली 80 मीटर चौड़ी सड़क के निर्माण के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस परियोजना के लिए जिला प्रशासन ने सामाजिक समाघात निर्धारण (सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट) की प्रारंभिक अधिसूचना जारी कर दी है। प्रस्तावित सड़क पल्ला गांव के पास निर्माणाधीन छह लेन सड़क को बील गांव के पास प्रस्तावित 105 मीटर चौड़ी सड़क से जोड़ेगी। इस कनेक्टिविटी के तैयार होने से क्षेत्र में यातायात सुगम होगा और औद्योगिक, वाणिज्यिक तथा लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को नई गति मिलेगी। यह सड़क भविष्य में ग्रेटर नोएडा के परिवहन नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बनेगी और क्षेत्रीय विकास को भी मजबूती प्रदान करेगी।


बोडाकी क्षेत्र में विकसित हो रहा मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब भविष्य में उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े परिवहन और लॉजिस्टिक्स केंद्रों में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी परिसर में भारतीय रेलवे के फ्रेट यार्ड और कोचिंग यार्ड भी विकसित किए जाने की योजना है, जिससे माल परिवहन और यात्री सेवाओं दोनों को बड़ा लाभ मिलेगा। इस परियोजना के पूरा होने के बाद सड़क, रेल और अन्य परिवहन साधनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा। इससे दिल्ली-एनसीआर सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों को तेज और आधुनिक परिवहन सुविधाएं मिलेंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से निवेश को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रेटर नोएडा राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स हब के रूप में अपनी पहचान मजबूत करेगा।

जिला प्रशासन के अनुसार, इस परियोजना के लिए दादरी तहसील के दतावली गांव की 9.6645 हेक्टेयर भूमि प्रस्तावित की गई है। परियोजना के सामाजिक प्रभाव का अध्ययन गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय द्वारा किया जाएगा। अध्ययन के दौरान प्रभावित किसानों, ग्रामीणों और अन्य हितधारकों से सुझाव और आपत्तियां भी आमंत्रित की जाएंगी ताकि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी और संतुलित तरीके से पूरी हो सके। इसके लिए विश्वविद्यालय ने हेल्पलाइन नंबर और ई-मेल भी जारी किए हैं। जिला प्रशासन ने जानकारी दी है कि सामाजिक समाघात निर्धारण की पूरी प्रक्रिया 60 दिनों के भीतर पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद भूमि अधिग्रहण की अगली कार्रवाई शुरू होगी। प्रशासन का कहना है कि परियोजना को नियमानुसार आगे बढ़ाया जाएगा ताकि विकास कार्यों के साथ प्रभावित लोगों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जा सके।