नोएडा सेक्टर-130 में 10 दिनों से बंद हैं स्ट्रीट लाइटें, अंधेरे से बढ़ी सुरक्षा चिंता; RWA ने JE को हटाने की उठाई मांग
- sakshi choudhary
- 23 Jul, 2026
नोएडा के सेक्टर-130 में पिछले 10 दिनों से स्ट्रीट लाइटें बंद होने के कारण स्थानीय लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। जानकारी के अनुसार, गेट नंबर-2 से सेक्टर के अंदर जाने वाली सड़क पर लगी सभी डेकोरेटिव लाइटें बंद पड़ी हैं। इसके अलावा सेक्टर के सामने स्थित 45 मीटर चौड़ी मुख्य सड़क और 9 मीटर सर्विस रोड पर लगी पोस्ट लाइटें भी लंबे समय से खराब हैं। रात के समय पूरे इलाके में अंधेरा छा जाने से लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि अंधेरे के कारण सड़क दुर्घटनाओं और आपराधिक घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। खासकर महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और देर रात घर लौटने वाले लोगों में सुरक्षा को लेकर चिंता का माहौल है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर संबंधित विभाग और अधिकारियों से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। निवासियों का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद स्ट्रीट लाइटें चालू नहीं कराई गईं, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। सेक्टर-130 आरडब्ल्यूए (RWA) के उपाध्यक्ष अशोक चौहान ने बताया कि इस संबंध में संबंधित जूनियर इंजीनियर (JE) संतोष पांडे से बात की गई थी। उनका कहना है कि जेई ने जवाब दिया कि फिलहाल मेंटेनेंस का टेंडर उपलब्ध नहीं है, इसलिए नया टेंडर जारी होने तक मरम्मत का कार्य संभव नहीं है। इस जवाब से स्थानीय निवासी संतुष्ट नहीं हैं और उनका कहना है कि इतनी बुनियादी सुविधा के लिए लोगों को लंबे समय तक इंतजार नहीं कराया जाना चाहिए।
इस पूरे मामले को लेकर सेक्टर-130 आरडब्ल्यूए ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित जेई संतोष पांडे को सेक्टर-130 के कार्यभार से हटाने की मांग की है। आरडब्ल्यूए का कहना है कि यदि समय रहते स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत नहीं की गई तो क्षेत्र में किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी। निवासियों ने नोएडा प्राधिकरण से मांग की है कि जल्द से जल्द नया मेंटेनेंस टेंडर जारी कर खराब स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त कराया जाए, ताकि क्षेत्र में सामान्य यातायात और सुरक्षा व्यवस्था बहाल हो सके। लोगों का कहना है कि स्मार्ट सिटी की दिशा में आगे बढ़ रहे नोएडा में इस तरह की बुनियादी सुविधाओं का लंबे समय तक बाधित रहना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।