नोएडा में 83 साल की डॉक्टर 5 दिन रहीं डिजिटल अरेस्ट, एफडी तुड़वाकर साइबर ठगों ने ऐंठे 18.50 लाख रुपये
- sakshi choudhary
- 23 Jul, 2026
नोएडा में साइबर ठगों ने एक 83 वर्षीय सेवानिवृत्त महिला डॉक्टर को अपना शिकार बनाते हुए डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 18.50 लाख रुपये की ठगी कर ली। सेक्टर-30 निवासी महिला डॉक्टर के मुताबिक, 13 जुलाई को उन्हें एक अज्ञात नंबर से कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को एयरटेल हेड ऑफिस का कर्मचारी बताया। उसने दावा किया कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल कर बैंक खाता खोला गया है, जिसका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य आपराधिक गतिविधियों में किया जा रहा है। इसके बाद कॉल को एक अन्य व्यक्ति से जोड़ दिया गया, जिसने खुद को महाराष्ट्र पुलिस का अधिकारी बताते हुए गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। ठगों ने डॉक्टर को पांच दिनों तक लगातार वीडियो कॉल और फोन के जरिए निगरानी में रखा और किसी से भी बात न करने के निर्देश दिए। मानसिक दबाव और सामाजिक प्रतिष्ठा खराब होने के डर से डॉक्टर ने आरोपियों की हर बात पर भरोसा कर लिया।
ठगों ने जांच के नाम पर महिला डॉक्टर से उनके बैंक खाते, एफडी, पोस्ट ऑफिस जमा और अन्य निवेश की पूरी जानकारी हासिल कर ली। अगले ही दिन उन्होंने सेक्टर-30 स्थित इंडियन बैंक शाखा पहुंचकर अपनी एफडी तुड़वाई और 10.50 लाख रुपये आरटीजीएस के जरिए कथित "सुरक्षित खाते" में ट्रांसफर कर दिए। इसके बावजूद साइबर अपराधियों का दबाव खत्म नहीं हुआ और 17 जुलाई को उन्होंने डॉक्टर से 8 लाख रुपये एक अन्य बैंक खाते में भी ट्रांसफर करा लिए। इस तरह कुल 18.50 लाख रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया। मामले की शिकायत मिलने के बाद नोएडा साइबर थाना पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। डीसीपी साइबर शैव्या गोयल के अनुसार, आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए बैंक खाते, मोबाइल नंबर, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), आईपी एड्रेस और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है ताकि जल्द से जल्द आरोपियों तक पहुंचा जा सके।
साइबर विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, वरिष्ठ नागरिक अक्सर डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर फ्रॉड का आसान निशाना बन जाते हैं क्योंकि उन्हें कानूनी और डिजिटल प्रक्रियाओं की सीमित जानकारी होती है। साइबर ठग पुलिस, सीबीआई, बैंक या टेलीकॉम कंपनियों का नाम लेकर डर और भरोसे का माहौल बनाते हैं तथा लोगों को परिवार या परिचितों से बात करने से रोकते हैं। याद रखें कि भारत में कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर किसी व्यक्ति को "डिजिटल अरेस्ट" नहीं करती और न ही जांच के नाम पर किसी निजी खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहती है। यदि इस तरह की कोई कॉल आए तो तुरंत कॉल काटें, परिवार को जानकारी दें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। समय रहते सतर्कता ही ऐसे ऑनलाइन फ्रॉड से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।