गौतम बुद्ध नगर के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), दनकौर में माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए आयोजित मानवीय एवं संवैधानिक मूल्यों पर आधारित तीन दिवसीय ‘प्रज्ञा प्रवाह’ प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे बैच का अंतिम दिन उत्साह, सहभागिता और गतिविधि आधारित सीख के साथ संपन्न हुआ। निर्धारित समय-सारणी के अनुसार शिक्षकों को विद्यालय एवं कक्षा प्रबंधन, परिवार और समाज की भूमिका, ध्यान एवं माइंडफुलनेस का महत्व, मूल्य आधारित शिक्षण योजना का प्रस्तुतीकरण तथा प्रशिक्षण के पूर्व और पश्चात आकलन जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। अंतिम दिन सकारात्मक एवं समावेशी विद्यालयी वातावरण तैयार करने, विद्यार्थियों के व्यवहार में मानवीय मूल्यों को विकसित करने तथा कक्षा में अनुशासन के साथ लोकतांत्रिक और सहयोगात्मक वातावरण स्थापित करने पर विशेष चर्चा हुई। साथ ही शिक्षकों को यह भी बताया गया कि बच्चों में मूल्यों का विकास केवल विद्यालय की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार और समाज की सक्रिय भागीदारी भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रशिक्षण के दौरान माइंडफुलनेस और ध्यान के माध्यम से शिक्षकों एवं विद्यार्थियों में एकाग्रता, आत्म-जागरूकता, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक सोच विकसित करने के प्रभावी तरीकों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी शिक्षकों ने मानवीय एवं संवैधानिक मूल्यों को विषय शिक्षण और विद्यालयी गतिविधियों से जोड़ते हुए अपनी शिक्षण योजनाओं का प्रस्तुतीकरण किया। कार्यक्रम के समापन से पहले प्रतिभागियों का पश्च आकलन, फीडबैक और एसडब्ल्यूओसी विश्लेषण भी कराया गया। इस प्रशिक्षण में संदर्भदाता के रूप में भूपेंद्र सिंह, दीक्षा, डॉ. रेनू राय, टी.एस. भोला कुमार, संदीप कुमार, अर्चना पांडेय, सुमिता, डॉ. अर्चना आर्य, रीना भारतीय, नियाज वारिस बारसी, वेद प्रकाश मौर्य, धनराज सिंह और निधि त्यागी ने विभिन्न सत्रों का संचालन किया। सभी विशेषज्ञों ने गतिविधि आधारित और सहभागितापूर्ण शिक्षण पद्धति के माध्यम से शिक्षकों को यह समझाया कि समानता, स्वतंत्रता, न्याय, बंधुता, सम्मान, सहयोग, सहानुभूति और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे संवैधानिक एवं मानवीय मूल्यों को विद्यालय की दैनिक गतिविधियों और कक्षा शिक्षण में प्रभावी रूप से कैसे शामिल किया जा सकता है। प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षकों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें व्यवहारिक रूप से मूल्य आधारित शिक्षा को लागू करने के लिए तैयार करना रहा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी राजेश खन्ना ने कहा कि ‘प्रज्ञा प्रवाह’ की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब प्रशिक्षण से प्राप्त सीख विद्यार्थियों के व्यवहार और विद्यालय की संस्कृति में स्पष्ट रूप से दिखाई दे। उन्होंने शिक्षकों से विषय शिक्षण के साथ-साथ समूह कार्य, बाल सहभागिता, संवाद और विद्यालयी कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों में मानवीय एवं संवैधानिक मूल्यों को विकसित करने का आह्वान किया। वहीं डायट की प्राचार्या श्रीमती अर्चना गुप्ता ने कहा कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है और प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को विद्यालयों में व्यवहारिक रूप से लागू करना आवश्यक है। उन्होंने प्रत्येक बच्चे को समान अवसर, सम्मान और अपनी बात रखने की स्वतंत्रता देने पर बल देते हुए न्याय, समानता, सहयोग, बंधुता और लोकतांत्रिक मूल्यों से युक्त विद्यालयी वातावरण विकसित करने की आवश्यकता बताई। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागी शिक्षकों ने अपने-अपने विद्यालयों में प्रशिक्षण से प्राप्त सीख को लागू करने तथा विद्यार्थियों में मानवीय संवेदनशीलता, सामाजिक समरसता, संवैधानिक चेतना, जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक मूल्यों के विकास के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया।